ईशान आनंद को पूर्व सीएम मायावती ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, संगठन से बाहर किए जा सकते हैं आकाश आनंद
नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती ने संगठन के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। साथ ही ईशान आनंद जो आकाश के छोटे भाई हैं उनको बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव अलगे साल की शुरूआत में हो सकते हैं। इसके चलते ही बसपा में उनके समर्थक सवाल पूछ रहे हैं अब उनका और आकाश आनंद का क्या होगा। आकाश आनंद के मेरठ समेत पूरे वेस्ट यूपी ही नहीं प्रदेश भर में बड़ी संख्या में संगठन के भीतर समर्थक मौजूद हैं। इन समर्थकों का मानना है कि ईशान आनंद को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब वो भी अधर में लटके हुए हैं। चुनाव सिर पर हैं और टिकट को लेकर भी दावेदारी की जा रही थी। चुनाव से पहले अचानक बहन जी के इस कदम से उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब आगे क्या करना है।
छोटा भाई बड़ी जिम्मेदारी
आकाश के छोटे भाई ईशान को अब बसपा में बड़ा दायित्व सौंपा गया है। मायावती ने ईशान आनंद को बसपा का मुख्य सेक्टर प्रभारी नियुक्त किया है। ईशान आनंद के पास 15 राज्यों की जिम्मेदारी रहेगी। आकाश को किनारे कर अब ईशान को आगे किया जा रहा है। इस बदलाव के बाद बसपा की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। ईशान आनंद को करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ईशान आनंद इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों और कामकाज की समीक्षा करेंगे। वह अपने पिता और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को रिपोर्ट करेंगे।
आकाश आनंद राजनीतिक मुस्तकबिल
मार्च में आकाश आनंद को बसपा से निकालने के एक महीने बाद उनकी वापसी हो गई थी। मई में मायावती ने आकाश आनंद को चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया था। पिछले हफ्ते उनको राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताते हुए मायावती ने उनसे यह पद छीन लिया था। आकाश आनंद ने सोशल मीडिया बदल लिया।पहले खुद को बताया था ‘बसपा वर्कर’ और अब बायो में खुद को बताया रहे ‘बसपा सपोर्टर’। उन्होंने महज तीन दिन में दूसरी बार बायो बदला। इसके बाद से मायावती के भाई आनंद कुमार के बड़े बेटे आकाश के सियासी कदम से चर्चाएं तेज हो गई हैं। मायावती ने अभी आकाश को बसपा से निकाले जाने का ऐलान नहीं किया है। आकाश आनंद को जल्द एक बार फिर बसपा से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इससे पहले वह इस वर्ष मार्च में बसपा से निष्कासित किए गए थे। उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को भी मायावती ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अशोक को एक महीने पहले दोबारा बसपा से निकाला जा चुका है। मायावती का कहना है कि अब अशोक सिद्धार्थ के लिए बसपा के दरवाजे पूरी तरह से बंद हो चुके हैं।


