टॉमहॉक मिसाइलें नहीं तोड़ सकीं मासूमों का हौसला

Shekhar Sharma
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ईरान के मीनाव में शजरेह तैयबेह प्राथमिक विद्यालय (Shajareh Tayyebeh Elementary School) में पढ़ाई के लिए फिर पहुंचने लगे हैं बच्चे मारे गए बच्चों के जीवित एक दोस्त ने कहा,

“हम अपने दोस्तों को याद करते हैं। हमारे दोस्त अब स्वर्ग (Heaven) में पढ़ रहे हैं और हम यहाँ धरती पर उनके रास्ते पर चलते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।”

नई दिल्ली। ईरान के मीनाव (Minab) शहर में स्थित शजरेह तैयबेह प्राथमिक विद्यालय (Shajareh Tayyebeh Elementary School) पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल युद्ध के पहले ही दिन एक भीषण मिसाइल हमला हुआ था। महीनों के तनाव और दुख के बाद, जीवित बचे बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए एक अस्थायी इमारत (Temporary Building) में स्थानांतरित किया गया है, जहाँ नए शैक्षणिक सत्र के लिए बच्चे फिर से आने लगे हैं, हालांकि, वहाँ का माहौल अब पहले जैसा नहीं। इन सबके बीच, कुछ बच्चे साहस भी दिखा रहे हैं। एक जीवित बचे छात्र यासिन (Yasin) ने कहा, “हम अपने दोस्तों को याद करते हैं। हमारे दोस्त अब स्वर्ग (Heaven) में पढ़ रहे हैं और हम यहाँ धरती पर उनके रास्ते पर चलते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।” इस स्कूल में हमले के वक्त 120 स्कूली बच्चे मौजूद थे। सभी अमेरिकी मिसाइल के हमले में मार दिए गए। मारे गए बच्चों में 73 लड़के और 47 लड़कियां शामिल थीं, जिनकी उम्र महज 6 से 13 साल के बीच थी। हमले के वक्त पहली मंजिल पर लड़कियां और निचली मंजिल पर लड़के पढ़ाई कर रहे थे। स्कूल की महिला प्रिंसिपल समेत 26 महिला शिक्षिकाएं, बच्चों को बचाने या पहली स्ट्राइक के बाद उन्हें लेने दौड़े 7 माता-पिता, एक स्कूल बस ड्राइवर और पास के क्लिनिक का एक कर्मचारी शामिल था। एक गर्भवती महिला के अजन्मे बच्चे की भी इसमें मौत हो गई थी। पहली मिसाइल गिरने के बाद जब स्कूल प्रशासन बच्चों को बाहर निकाल रहा था और पैनिक में माता-पिता स्कूल की तरफ भागे, तभी दूसरी मिसाइल आ गिरी, जिससे कई लोग मलबे के नीचे ही दब गए। उदाहरण के लिए, चौथी कक्षा (Class 4A) के 8 लड़कों (जैसे सेफ़ा, आमीर अली, हाने, ताहा आदि) की इस हमले में मौत हो गई थी। हमले की तीव्रता इतनी भीषण थी कि कई महीनों तक फोरेंसिक टीमों को डीएनए (DNA) टेस्ट के जरिए बच्चों के अंगों की शिनाख्त करनी पड़ी। तीन बच्चे (माकान नासिरी, मसीहा सालारी और आमीरअली जेदवी) ऐसे थे, जिनका कोई अवशेष कभी नहीं मिल सका। 7 साल के माकान नासिरी के अवशेषों के रूप में सिर्फ उसका एक खून से सना हुआ स्वेटर और एक जूता मिला, जिसे पास की मस्जिद में कांच के बॉक्स में संभाल कर रखा गया है और कब्रिस्तान में उसकी एक प्रतीकात्मक कब्र बनाई गई है।

WAR ‘वॉर म्यूजियम’ में तब्दील

स्कूल की इमारत अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और उसे एक ‘वॉर म्यूजियम’ व स्मारक का रूप दिया जा रहा है। मलबे के बीच आज भी बच्चों की बिखरी कॉपियां, ड्राइंग स्टेंसिल और दीवारों पर बने रंग-बिरंगे फूलों के चित्र देखे जा सकते हैं। मीनाव प्रशासन इस पुराने स्कूल के पास ही एक नया और बड़ा स्कूल बनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी पूरी तरह स्वीकार नहीं की है, लेकिन पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की आंतरिक जांच और ब्लूमबर्ग (Bloomberg) व फॉरेन्सिक आर्किटेक्चर (Forensic Architecture) की हालिया खोजी रिपोर्टों में तबाही की मुख्य वजहें सामने आई। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) द्वारा इस मामले की प्रशासनिक जांच (यूएस आर्मी रेगुलेशन 15-6 प्रोब) शुरू की गई है। लीक हुई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध के पहले दिन बेहद आक्रामक और बड़े पैमाने पर हवाई हमले का दबाव बनाया था, जिससे सैन्य अधिकारियों को टारगेट की दोबारा जांच करने और ‘नागरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल’ (Civilian Harm Safeguards) का पालन करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। इसे अधिकारियों ने “रोकने योग्य गलतियों की एक श्रृंखला” (Cascade of preventable failures) कहा है।

WAR CRIMES

सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय तथ्य-खोज मिशन (Independent International Fact-Finding Mission on Iran) ने अपनी रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि मीनाव स्कूल पर किया गया मिसाइल हमला पूरी तरह ‘अंधाधुंध’ (Indiscriminate) था और इसके पर्याप्त आधार हैं कि अमेरिका ने यहाँ युद्ध अपराध किए हैं।

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