नाटो सहयोगी तुर्की ने ट्रंप को दिया फंसा

Shekhar Sharma
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ईरानी एयरलाइंस के विमानों ने अमेरिकी डेडलाइन के बाद भी तुर्की के इस्तांबुल, अंकारा और इज़मिर जैसे शहरों में उड़ानें भरीं।

नई दिल्ली। ईरान के साथ चल रही जंग से निकलने के लिए हाथ-पांव फैंक रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारी मुसीबत में फंस गए हैं। उनकी मुसीबत की वजह नोटो का सहयोगी तुर्की है। डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान से जंग और तुर्की से नाइत्तेफाकी को लेकर हालात एक ओर कुंआ और दूसरी ओर खाई सरीखी है। स्थिति ट्रंप के लिए बेहद पेचीदा हो गई है, क्योंकि उन्हें एक तरफ ईरान के खिलाफ अपनी सख्त नीति को लागू रखना है और दूसरी तरफ अपने एक महत्वपूर्ण नाटो सहयोगी तुर्की के साथ संबंधों को भी संभालना है। दरअसल तुर्की खुलकर ईरान की मदद कर रहा है। वो डोनाल्ड ट्रंप की परवाह तक नहीं कर रहा हे। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं और सहयोगियों को चेतावनी दी थी कि वे ईरानी एयरलाइंस को अपने यहां उतरने की अनुमति न दें। इसके बावजूद, कैस्पियन एयरलाइंस (Caspian Airlines) और ईरान एयर (Iran Air) समेत करीब 12 ईरानी एयरलाइंस के विमानों ने अमेरिकी डेडलाइन के बाद भी तुर्की के इस्तांबुल, अंकारा और इज़मिर जैसे शहरों में उड़ानें भरीं।

ट्रंप के सामने कूटनीतिक संकट

तुर्की लंबे समय से अमेरिका के सबसे आधुनिक F-35 फाइटर जेट प्रोग्राम में दोबारा शामिल होने की कोशिश कर रहा है। रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के बाद अमेरिका ने तुर्की को इस प्रोग्राम से बाहर कर दिया था। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ अपने करीबी संबंधों का हवाला देते हुए तुर्की को F-35 सौदे तक दोबारा पहुंच देने के सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन ईरान पर पर अमेरिकी प्रतिबंधों और नाटो (NATO) सहयोगी तुर्की की हरकतों के कारण ट्रंप प्रशासन के सामने एक बड़ा कूटनीतिक संकट खड़ा हो गया है।

टकराव की वजह

एक तरफ ट्रंप ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह अलग-थलग (Cracked down) करना चाहते हैं, वहीं उनका नाटो सहयोगी तुर्की ईरानी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों का इस्तेमाल करने दे रहा है। तुर्की की इस हरकत से अमेरिकी प्रशासन बेहद नाराज है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मदद करने के बाद अमेरिकी कांग्रेस और ट्रंप प्रशासन के लिए तुर्की को F-35 जैसे संवेदनशील और आधुनिक फाइटर जेट सौंपना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

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