
सिस्टम को देना होगा एक-एक आंसू का हिसाब, साहब ये दिल से निकली टीस कहीं बर्बाद ना करे आपको



आवास विकास परिषद के अधिकारियों को सजा क्यों नहीं, व्यापारियों का आखिर कसूर ही क्या है

मेरठ।व्यापारियों की बर्बादी की पठकथा लिखने वाले आवास विकास के अफसरों को कौन बचा रहा है। या फिर यह मान लिया जाए कि सारा कसूर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का उन्होंने मान लिया है जिनके सामने व्यापारी इंसाफ के लिए खड़े हैं। लेकिन इंसाफ के नाम पर सिर्फ व्यापारियों को सजा देने बगैर किसी सुनवाई के पहले से तय कर लिया गया है, यानि आवास विकास परिषद के अधिकारियों को बचाने और व्यापारियों से उनका रोजगार छिनकर उन्हें बर्बाद कर देने की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी है। बाकि कोर्ट का आदेश, कोर्ट में दलील, चाट बाजार का कान्सेप्ट और कोर्ट में सुनवाई तथा सेटबैक छोड़ना सरीखी तमाम वो बाते हैं जिनकी आड़ में आवास विकास परिषद के उन अधिकारियों को बचाना है जिनकी वजह ये व्यापारियों को यह दिन देखना पड़ रहा है। क्या इनका कसूर केवल इतना है कि समय पर टैक्स भरती है ताकि सरकार के कामकाज आराम से चलते रहें, जो भी चंदा मांगने पहुंचता है उसको चंदा देते हैं। सामाजिक और धार्मिक कामों में बढ़चढ़ का भाग लेते हैं। जब भीड़ की जरूरत होती है तब भी इन्हें ही बुलाया जाता है। ये कहां कोई कमी करते है और किस बात की सजा इन्हें दी जा रही है। यदि ये कसूरवार है तो पूरा सिस्टम कसूरवार है वो भी जिन्होंने इन्हें अंधेरे में रखा झूठा दिलासा देते रहे।

भाजपा नेताओं की फजीहत

शहर के व्यापारियों का कहना है कि अधिकारियों को बचाने के नाम पर सिस्टम ने भाजपा के सांसदों, विधायक, महापौर और संगठन के पदाधिकारियों की भी व्यापारियों की नजर में बुरी फजीहत करा डाली है। सवाल यही है कि जब मुकदमे दर्ज करा दिए गए हैं और मुकदमें भी आवास विकास परिषद के अफसर ने कराए है तो फिर जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों बचाया और व्यापारियों को क्यों बर्बाद करने पर उतारू हैं। व्यापारियों से ऐसी क्या दुश्मनी है जो सिर्फ उन्हें ही कसूरवार मान लिया गया है। व्यापारी का सिर्फ और सिर्फ इतना कसूर है कि वह चुप रहता है। भले ही कितना जुर्म और ज्यादती की जाए वह हमेशा चुप रहकर सहता है, लेकिन जो अब तक हुआ वो अब नहीं होगा। सिस्टम चलाने वाले यह बात अच्छी तरह से समझ लें कि यदि व्यापारियों के भवनों पर जेसीबी चलेगी तो वो जेसीबी पहले कसूरवार अधिकारियों के घरों पर चलेगी। यदि व्यापारियो के बच्चों के आंखों में आंसू होंगे तो अधिकारियों के परिवार वाले कैसे मुस्कुरा सकते हैं। इंसाफ का यही तकाजा है। इंसाफ होगा तो बराबर का वर्ना जैसे चल रहा है वैसे चलने दीजिए। बहुत आए और चले गए। अब व्यापारी चुप नहीं बैठने वाला है। कोई साथ दे या ना दे, व्यापारी अपनी लड़ाई खुद लड़ना जानता है।

इनके नाम पर एफआईआर
एसपीएन सिंह (अधीक्षण अभियंता), जीएस पालीवाल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), जमना प्रसाद (से.नि. अधिशासी अभियंता), एके जैन (अधिशासी अभियंता), आरके गुप्ता (अधिशासी अभियंता), नरसिंह प्रसाद (अधीक्षण अभियंता) , एके बंसल (से.नि. अधीक्षण अभियंता), सीके जैन (अधीक्षण अभियंता), अरविंद कुमार (अधीक्षण अभियंता), हरेंद्र सिंह नरेश (से.नि. अधीक्षण अभियंता), राम सहाय सिंह (अधीक्षण अभियंता), ज्ञानेंद्र सिंह (अधीक्षण अभियंता), देवेंद्र सिंह (सहायक अभियंता), रविंद्र कुमार (अवर अभियंता) ,योगेंद्र कुमार वर्मा (अवर अभियंता),उमेश मोहन शर्मा (सहायक अभियंता), पिंकू गौतम (सहायक अभियंता), डीके गोयल (सहायक अभियंता) , वीरेंद्र कुमार (अवर अभियंता) शशि भूषण (सहायक अभियंता) कमल सिंह (अवर अभियंता),संजीव शुक्ला (अवर अभियंता), एनके शर्मा (सहायक अभियंता), सुखबीर सिंह (अवर अभियंता), सोहनपाल (से.नि. सहायक अभियंता), शांति प्रसाद (से.नि. सहायक अभियंता), आरपी सिंह (से.नि. सहायक अभियंता), जगदीश कुमार अरोरा (अवर अभियंता), रतनवीर सिंह (अवर अभियंता), सुरेंद्र कुमार वडेरा (से.नि. सहायक अभियंता), देवराज वर्मा (से.नि. सहायक अभियंता), बसंत लाल मैनी (से.नि. अवर अभियंता), एके भटनागर (से.नि. अवर अभियंता) , ओमपाल सिंह (अवर अभियंता), राम किशन शर्मा (अवर अभियंता), चंद्रभान कश्यप (से.नि. अधिशासी अभियंता), रियाजुद्दीन (अवर अभियंता), आरए वर्मा (अधिशासी अभियंता), जीत सिंह (अवर अभियंता), रविकांत (सहायक अभियंता), श्रीधर भांडेगावकर (से.नि. सहायक अभियंता), आरके सक्सेना (सहायक अभियंता) , भोलानाथ (अधिशासी अभियंता) , चंद्रपाल (अवर अभियंता), मनोहर कुमार (से.नि. अधिशासी अभियंता) के नाम शामिल हैं। (इनमें से चार अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है)।


