
प्रीपेड मीटरों का किया दहन, बने हैं लोगों की मुसीबत, प्रीपेड मीटर की शव यात्रा निकाल ऊर्जा निगम कार्यालय पर किए आग के हवाले, व्यापारियों के लिए संकट – जबरन थोपे जा रहे फैसले नहीं होंगे बर्दाश्त: लोकेश अग्रवाल
मेरठ 23 अप्रैल। प्रीपेड मीटर लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। लोगों की अनुमति के बगैर ही उनके मीटरों को प्रीपेड में बदला जा रहा है। अनाप शनाप बिल भेजे जा रहे हैं। इस मामले को लेकर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने प्रदेश में लगाए जा रहे प्रीपेड मीटरों को लेकर विद्युत विभाग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह योजना पूरी तरह अव्यवस्थित, अपारदर्शी और व्यापारी विरोधी साबित हो रही है। उनके नेतृत्व में ऊर्जा निगम मुख्यालय विक्टोरिया पार्क पहुंचे व्यापारियों ने प्रीपेड मीटर आग के हवाले किए। लोकेश अग्रवाल आज मेरठ के व्यापारियों के साथ प्रीपेड मीटर वापस लो के नारे लगाते हुए प्रीपेड मीटर की शव यात्रा लेकर एम डी ऊर्जा निगम कार्यालय पहुंचे। जहां प्रीपेड मीटर के पुतले का दहन किया गया।
बाद में सभी व्यापारी ऊर्जा निगम कार्यालय पर उनके एमडी से मिलने और उन्हें बिजली विभाग की समस्या को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे। लेकिन 1 घंटे से अधिक इंतजार देखने के बाद जब एमडी नहीं आए तो प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने एमडी कार्यालय के बाहर ज्ञापन चस्पा कर नारे लगाते हुए वापस आ गए।
अकारण काटी जा रही लाइट
ऊर्जा निगम कार्यालय पर व्यापारी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रीपेड मीटर के कारण हजारों व्यापारियों और उपभोक्ताओं की बिजली बिना किसी ठोस कारण के काटी जा रही है, जिससे व्यापार ठप होने की कगार पर है। विभाग का सर्वर बार-बार फेल हो रहा है और भुगतान करने के बावजूद उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखा जा रहा है।
डिजिटल लूट और कुछ नहीं
लोकेश अग्रवाल ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग प्रीपेड मीटर के नाम पर नई प्रकार की ‘डिजिटल लूटÓ को बढ़ावा दे रहा है। वर्षों पुराने बकाए को बिना आधार दिखाकर रिकवरी भेजी जा रही है और पी.डी. कनेक्शन के नाम पर भारी अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को न तो उनकी सिक्योरिटी का हिसाब दिया जा रहा है और न ही मीटर से जुड़ी बुनियादी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मोबाइल नंबर अपडेट नहीं किए जा रहे, ऐप ठीक से काम नहीं कर रहा और सीलिंग सर्टिफिकेट तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हैं – यह पूरी व्यवस्था की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।


