समझौता या तो शानदार या फिर होगा नहीं

Shekhar Sharma
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डोनाल्ड ट्रंप बोले बातचीत काफी आगे और तेजी से बढ़ रही है, उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि यह समझौता बेहद शानदार होगा या होगा ही नहीं

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए बैठकों का दौर इस बार पाकिस्तान के इस्लामाबाद नहीं बल्कि दोहा की राजधानी कतर में चल रहा है। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग खत्म करने और शांति समझौता करने के लिए बातचीत काफी आगे तक पहुंच गयी है। जानकारों की मानें तो यह बातचीत इस वक्त ऐसे दौर में जहां से अमेरिका और ईरान दोनों ही यूटर्न लेना उनके लिए गैरमुनासिव होगा। मसलन दोनों ही देश मान रहे हैं कि बातचीत लॉस्ट स्टेज पर है। इसीक्रम में ईरान का एक हाईलेबल डेलीगेशन इस वक्त कतर में है। इस डेलीगेशन को ईरानी के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची लीड कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर पहुंचने के लिए “सबसे संवेदनशील अनसुलझे मुद्दों” पर चर्चा करने के लिए कतर पहुंच गए हैं।

मुस्लिम देशों से इजरायल को लेकर आग्रह

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से चल रही बातचीत से काफी उत्साहित हैं। उनका दावा है कि ईरान से समझौता बेहद सार्थक और शानदार रहने वाला है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा की यह समझौता या तो बेहद शानदार होगा या फिर होगा ही नहीं। साथ ही यह भी कि यदि समझौता नहीं होता तो यह मिडिल ईस्ट ही नहीं दुनिया के लिए बहुत बुरा होगा। रिपोर्ट बता रही है कि ईरान से ज्यादा इस समझौते की अमेरका को दरकार है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन और तुर्की सहित कई देशों से ईरान के साथ हुए समझौते के तहत इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अब्राहम समझौते में शामिल होने का आग्रह किया है।

दो पाइंट पर फंसा है पेंच

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते अब दो पेंचों पर फंसा है। पहला तो स्ट्रेट होर्मूज का स्वतंत्र रूप से खोला जाना। मसलन जिस तरह के इंतजाम वहां पहले थे, ठीक वैसे ही हों, लेकिन ईरान इसके लिए राजी नहीं है। ईरान का साफ कहना है कि वह अपने देश से होकर गुजरने वाले कारगोशिप्स से टोल वसूलेगा और दूसरा एटमी कार्यक्रम जिसको लेकर ईरान ने वार्ताकारेां को साफ बता दिया है कि सवर्धन यूरेनियम अमेरिका को नहीं सौंपा जाएगा। माना जा रहा है कि कोई ना कोई बीच का रास्ता वार्ताकार जरूर निकाल लेंगे। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी के साथ इन नेताओं की वार्ता होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार और विदेशी बैंकों में जमे ईरानी धन (फ्रीज़ फंड्स) की रिहाई पर केंद्रित है।

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