एलएलआरएम के प्रधानाचार्य ने जारी किया फरमान ना पास ना वाहन, तो सिक्योरिटी गार्ड जब्त कर लेंगे गाड़िया
मेरठ। एलसलआरएम यानि लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज में यदि किसी भी स्टाफ का वाहन बगैर पास कैंपस में नजर आया तो उसको कैंपस के सिक्योरिटी गार्ड जब्त कर लेंगे। प्रधानाचार्य डा. आरसी गुप्ता ने इसको लेकर बाकायदा आज एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि एलएलआरएम के सभी स्टाफ जो वाहन से कैंपस में आते हैं या कैंपस में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए वाहन का यूज करते हैं वो सभी स्टाफ मेडिकल ओर से जारी किए गए पास अपने वाहनों पर अवश्य ही चस्पा करें। जिनको वाहन पास नहीं मिल सके हैं स्टाफ के वो लोग मेडिकल के सैंट्रल स्टार के संजीव तोमर से वाहन पास ले सकते हैं। लेकिन वाहन पर वाहन पास अवश्य लगाएं।
एक जून से आदेश लाग
मेडिकल प्रधानाचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि यह व्यवस्था पहली जून से प्रभावी हो गयी है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था अक्सर मेडिकल के सिक्योरिटी गार्ड के साथ होने वाले विवाद से बचने के लिए लागू की गयी है। अक्सर स्टाफ के लोगों का मेडिकल के सिक्योरिटी गार्ड से वाहनों की आवाजाही को लेकर विवाद हो जाता है। ये विवाद भविष्य में ना हों, इसके लिए पहली जून से स्टाफ के वाहनों पर वाहन पास की अनिवार्यता लागू की गयी है।
जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म (Congenital Hypothyroidism) शैक्षणिक कार्यक्रम

Meerut. एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ के बाल रोग विभाग (Department of Pediatrics) द्वारा जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म (Congenital Hypothyroidism) विषय पर विश्व थ्थायरॉइ दिवस 25 मई को एक शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजातों में जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग एवं उपचार के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस स्थिति में बच्चा जन्म से पर्याप्त थायरॉइड हार्मोन नहीं बना पाता, जिससे मस्तिष्क एवं शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है यदि समय पर उपचार न मिले।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. विजय जायसवाल ने अपने व्याख्यान में जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म के चिकित्सीय महत्व, नवजात स्क्रीनिंग की आवश्यकता तथा बहुविषयक दृष्टिकोण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक पहचान बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. तूबा कमर ने नवजातों में थायरॉइड विकारों के प्रारंभिक संकेतों, TSH एवं T4 आधारित जांच, उपचार की रणनीतियों तथा नियमित फॉलो-अप के महत्व पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने नवजात स्क्रीनिंग को बाल स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। कार्यक्रम के अंत में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा: “हर नवजात को समय पर जांच और उचित उपचार उपलब्ध कराना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता, प्रारंभिक स्क्रीनिंग और बहुविषयक सहयोग से हम बच्चों को स्वस्थ और बेहतर भविष्य दे सकते हैं।” इस कार्यक्रम में बाल रोग (Pediatrics) तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics & Gynecology) विभाग के फैकल्टी सदस्यों एवं रेजिडेंट्स ने भाग लिया।


