शताब्दी नगर, लोहिया नगर व वेदव्यासपुरी में चार दिन से सफाई नहीं, अधिकारियों को घेरा, एक दूसरे के पाले में डाल रहे हैं गेंद
मेरठ। महानगर के शताब्दी नगर, लोहिया नगर और वेद व्यासपुरी इन तीनों आवासीय योजनाओं में चार दिन से सफाई कर्मचारी नहीं आ रहे हैं। वहां कूड़े के ढ़ेर लग गए हैं। अधिकारियों का रवैया बजाए आगे बढ़कर समस्या को समाधान कराने के एक दूसरे के पाले में गेंद डालने वाला है। इस मामले को लेकर आज पार्षदों व क्षेत्र के लोगों ने तथा जिन कर्मचारियों को हटा दिया गया है उन्होंने अधिकारियों को घेराव किया। साथ ही चेतावनी दी गयी है कि यदि आज शाम तक सफाई का काम शुरू नहीं कराया गया तो मंगलवार का दिन अफसरों के लिए अमंगलकारी साबित होगा। हालांकि अपर नगरायुक्त लवि त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम का प्राधिकरण पर जो बकाया है, उसका ना तो भुगतान किया जा रहा है ना ही वाहन निगम को दिए जा रहे हैं।
यह है पूरा मामला
महानगर की शताब्दी नगर, लोहिया नगर और वेद व्यासपुरी योजना मेरठ विकास प्राधिकरण ने विकसित कर इनको नगर निगम को काफी पहले नगर निगम को सौंप दिया था। इनकी साफ सफाई का काम अब नगर निगम के जिम्मे है। क्षेत्र के लोगों को लेकर प्राधिकरण पहुंचे पार्षद कीर्ति घोपला ने बताया कि बीते शुक्रवार से तीनों आवासीय योजनाओं में सफाई कर्मचारी नहीं आ रहे हैं। सफाई ना होने की वजह से कूड़े कचरे के ढेर लग गए हैं। लोगों का रास्ते से निकलना भी मुसीबत हो गया है। गंदगी की वजह से सड़ांध उठ रही है। जब इसको लेकर कर्मचारियों से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि उन्हें काम से हटा दिया गया है। तीनों योजनाओं में करीब सत्तर कर्मचारी हैं जो साफ-सफाई का कार्य करते हैं, लेकिन एक साथ सत्तर कर्मचारियों के द्वारा काम पर ना आने के बाद हालात कितने खराब हो जाएंगे इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
एक दूसरे के पाले में डाल रहे गेंद
इस मामले को लेकर आज सुबह सबसे पहले पार्षद कीर्ति घोपला के नेतृत्व में अन्य पार्षद, क्षेत्रवासी व जिन्हें हटा दिया गया है वो कर्मचारी प्राधिकरण पहुंचे। उन्होंने मेडा उपाध्यक्ष को पूरा मामला बताया। पार्षद कीर्ति घोपाला जो इस बातचीत में शामिल थे, ने बताया कि उपाध्यक्ष ने गेंद नगर निगम के पाल में डाल दी। उसके बाद नगरायुक्त सौरभ गंगवार से बात की गयी। नगरायुक्त ने इन्हें अपर नगरायुक्त लवि त्रिपाठी के पास भेज दिया। लवि त्रिपाठी का कहना था कि मेडा ने अपनी तीनों आवासीय कालोनियां तो नगर निगम को ट्रांसफर की लेकिन जो रकम नगर निगम को देनी थी वो मेडा ने अभी तक नहीं दी है। उन्होंने बताया कि जो सफाई कर्मचारी लगाए जाते हैं उनको भुगतान करना होता है। अन्य खर्च होते हैं, इसकी एवज में जो रकम तय हुई थी वो मेडा से मिलनी बाकि है। यहां तक कि मेडा ने अभी वाहन तक नहीं दिए हैं।
आज शाम तक का अल्टीमेटम
जो लोग नगर निगम और प्राधिकरण के अफसरों से बात करने को गए थे उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आज शाम तक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मंगल को जो कुछ होगा उसके लिए वो जिम्मेदार नहीं होंगे। वहीं दूसरी ओर कर्मचारी जिनकी संख्या करीब सत्तर है और उन्हें हटा दिया गया है, उनका कहना है कि विवाद नगर निगम और प्राधिकरण के बीच लेनदेन का है इसके लिए उनकी नौकरी क्यों छीन ली गयी। कीर्ति घोपला का कहना है कि किसी भी हालात में ना तो सफाई सफाई बंद करने दी जाएगी और ना ही कर्मचारियों का अहित होने दिया जाएगा।


