ईरान का यूएस ठिकानों पर हमला

Shekhar Sharma
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युद्ध विराम के लिए शांति समझौता होने के बावजूद दोनों देश स्ट्रेट होर्मूज को लेकर फिर आमने सामने

नई दिल्ली। शांति समझौता दस्तख्त होने के बाद भी अमेरिका और ईरान स्ट्रेट हार्मूज को लेकर आमने सामने आ गए हैं। समझौत के महज दस दिन के भीत ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के एक मिल्ट्री बेस को ठिकाना बनाया है। ईरानी रिवाेल्यूशनरी गार्ड कार ने इसकी पुष्टि की है। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि स्ट्रेट हाेर्मूज के प्रतिबंधित क्षेत्र से यदि कोई जहाज गुजरेगा तो उसका निशाना बनाते हुए इसी प्रकार की कार्रवाई आगे भी की जाती रहेगी। ईरान ने यह चेतावनी दी है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है अमेरिका ने उकसावे की कार्रवाई की जिसके बाद उसके ठिकानों पर हमला किया गया।

भीषण लड़ाई छिड़ने की चेतावनी

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि दोबारा हिमाकत की गयी तो भीषण लड़ाई छिड़ जाएगी। आईआरजीसी ने अमरिका के हमलों को युद्धविराम और अमेरिकी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया, और दावा किया कि इसके जवाब में, “क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती के केंद्रों” को निशाना बनाया गया. निशानों के स्थान, हमले के प्रकार या संभावित नुकसान के बारे में कोई विवरण जारी नहीं किया गया है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी हमले दोबारा दोहराए जाते हैं, तो ईरान की प्रतिक्रिया और भीषण होगी। इन हालातों ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट के देशों की चिंता में इजाफा कर दिया है।

शुरूआत अमरेिका की

दरअसल जो कुछ हुआ उसकी शुरूआत अमेरिका ने की। अमेरिका को इसके लिए ईरान ने कसूरवार ठहराया है। अमेरिकी सेना ने एक दिन पहले यानि शुक्रवार को ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और कोस्टल रडार पोज़िशन पर हमला किया। यह कार्रवाई उस ड्रोन हमले के बाद हुई, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज़ (कार्गो शिप) को निशाना बनाया गया था। अमेरिकी सेंटकॉम ने ‘सीज़फायर उल्लंघन’ बताते हुए ईरान पर हमला बोला। ईरान का कहना है कि कार्गो शिप पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो होर्मुज़ स्ट्रेट के उस रास्ते से जा रहा था जिसे ईरान ने अधिकृत नहीं किया है।

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