
चंपक राय के लिए छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर कर के असली और बड़े दोषियों को बचाया का आरोप, बोले चंपक राय ही असली गुनाहगार
नई दिल्ली।जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद जी महाराज ने आरोप लगाया है कि अयोध्या जी के श्रीराम मंदिर में लूट करने वालों को बचाया जा रहा है। ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या राम मंदिर [Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra] में दान और चंदे की चोरी को लेकर एक बड़ा [Ram Temple controversy] बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर कर के असली और बड़े दोषियों को बचाया जा रहा है। किसी का नाम ना लेते हुए उन्होंने चंपक राय बंसल को बचाने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व को “नकली” करार दिया है। शंकराचार्य ने कहा है कि राम मंदिर के दान-चढ़ावे में हुए घोटाले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचा लिया गया है। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि निर्माण के समय से ही संतों की उपेक्षा की गई और अपने चहेते लोगों को शामिल किया गया।
अरविंद केजरीवाला का भाजपा पर बड़ा हमला
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविन्द केजरी वाल ने अयोध्या में राम मंदिर चढावे और चंदे चोरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि “ये लोग भगवान राम के नाम पर सत्ता में आए थे, और अब प्रभु राम खुद इन्हें सत्ता से बाहर खदेड़ देंगे”। इससे पहले आप सांसद संजय सिंह ने एसआईटी को कुछ सबूत सौंपने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के नाम पर जो ट्रस्ट बनाया गय है वह केवल लूट के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्यों को मंदिर का काज सौंप दिया जाना चाहिए। सब कुछ खुद ठीक हो जाएगा, लेकिन आरएसएस वाले ऐसा नहीं होने देंगे।
“जब तक राम लला टेंट में थे, तब तक सुरक्षित थे”
अयोध्या के संतों और स्थानीय निवासियों ने राम मंदिर में हुई चंदा चोरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ट्रस्ट प्रबंधन पर बेहद आक्रामक और गंभीर आरोप लगाए हैं। संतों का गुस्सा इस बात पर फूटा है कि भक्तों की अटूट आस्था के केंद्र में सैकड़ों करोड़ रुपये की इतनी बड़ी लूट हो गई और जिम्मेदार लोग केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि “जब तक राम लला टेंट में थे, तब तक सुरक्षित थे”। संतों का सीधा आरोप है कि आज राम मंदिर की व्यवस्था पर उन लोगों का कब्ज़ा है, जिनका आस्था से कोई लेना-देना नहीं है।
संतों को सौंपी जाए कमान
उन्होंने मांग की है कि जिस तरह अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी मंदिर का संचालन साधु-संत निष्पक्षता से कर रहे हैं, वैसे ही राम मंदिर का प्रबंधन भी संतों को सौंपा जाना चाहिए। संत निर्मोही होते हैं, वे कभी ऐसी ‘डकैती या चोरी’ नहीं करेंगे। अयोध्या के कुछ संतों और स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि राम मंदिर में यह लूट काफी लंबे समय से चल रही थी। यही कारण है कि भगवान राम ने खुद भाजपा को अयोध्या (फैजाबाद लोकसभा सीट) से चुनाव हरा दिया, क्योंकि भगवान खुद अपने भक्तों के साथ हुए इस धोखे को बर्दाश्त नहीं कर पाए। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने कारसेवकों (जैसे संतोष दुबे) और संतों का आरोप है कि चोरों ने भगवान के आभूषणों के साथ-साथ उनके पूजनीय खड़ाऊ तक को निशाना बनाया है। विपक्ष के नेता भी संतों के इस गुस्से को धार दे रहे हैं। जहाँ उद्धव ठाकरे ने इसे “हिंदुओं के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात” बताया है, वहीं शिवसेना (UBT) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में इस घटना की तुलना ‘महमूद गजनवी’ द्वारा की गई ऐतिहासिक लूट से तक कर दी है।


