स्टे की मियाद पूरी तो भी कार्रवाई राजी नहीं अफसर

Shekhar Sharma
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बेदखली के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट के पहले स्टे की मियाद खत्म तो दूसरा स्टे के लिए लगा दी है अर्जी, तहसीलदार को दाखिल करना है जवाब

मेरठ। जनपद के हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा संख्या 254 सरकारी खाद गड्ढे की जमीन जिस पर अवैध कब्जे के की शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार ने आरोपी को पंद्रह दिन के भीतर अवैध कब्जा हटाने के आदेश देते हुए बेदली के आदेश दिए थे। इन आदेशों के खिलाफ आरोपी पक्ष हाईकोर्ट से स्टे ले आया। हाईकोर्ट के स्टे की मियाद एक माह थी। स्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी तहसीलदार कार्यालय बजाए बेदखली की कार्रवाई करने के हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। नतीजा यह हुआ कि खसरा संख्या 254 की सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जा करने वाला पक्ष दोबारा स्टे हासिल करने के लिए हाईकोर्ट पहुंच गया है। उसकी अर्जी पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय अधिकारियों को पार्टी बनाते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है। यह जवाब तहसीलदार कार्यालय द्वारा दाखिल किया जाना बताया जा रहा है, लेकिन हैरानी इस बात कि है सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के नाम पर दो बार बेदखली का नोटिस संबंधित को जारी करने वाले हाईकोर्ट के नोटिस का जवाब देने को अभी तैयार नजर नहीं आ रहे हैं।

यह है मामला

हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा संख्या 254 सरकारी खाद गड्ढे की जमीन सरकारी कागजो में दर्ज है। समसपुर निवासी संजीव पुत्र ताराचंद ने उक्त जगह पर गांव के सतबीर पर कब्जा कर अवैध निर्माण की शिकायत की। इस शिकायत पर साल 2025 में तहसीलदार के यहां से सतबीर को बेदली का नोटिस थमा दिया गया। नोटिस के खिलाफ सतबीर हाइकोर्ट चला गया। वहां से उसको टाइम बाउंड यानि एक माह का स्टे मिल गया। बकौल संजीव स्टे की मियाद खत्म होने के बाद भी तहसीलदार कार्यालय बेदली की कार्रवाई नहीं कर रहा है। केवल इतना भर किया गया है कि दोबारा से बेदखली का नोटिस तसबीर को थमा दिया गया है। जबकि होना यह चाहिए था कि जब हाईकोर्ट से मिले नोटिस की मियाद पूरी हो गयी वह निष्प्रभावी हो गया तो तहसीलदार कार्यालय को पहल करते हुए बेदखली की कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संजीव का आरोप है कि केवल नोटिस-नोटिस खेला जा रहा है और यह सारी कवायद केवल और केवल सतबीर के अवैध कब्जे को बजाए के लिए की जा रही है। तहसीलदार ने जब दोबारा बेदखली का नोटिस जारी किया तो सतबीर अब दोबारा भी हाईकोर्ट जा पहुंचा और स्टे के लिए अर्जी दाखिल की है। उसकी अर्जी पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है जो तहसीलदार को दाखिल करना है, लेकिन जवाब दाखिल करने में भी टाल मटोल की जा रही है।

अपनी ही संपत्ति पर गंभीर नहीं अफसर

मामले की शिकायत तमाम स्तरों पर तथा शासन तक करने वाले संजीव ने बताया कि वह तहसील दिवस पर जिलाधिकारी से मिले थे और मामले की पूरी जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि जो खसरा नंबर कब्जाया गया है वह सरकारी संपत्ति है। सरकारी संपत्ति पर कब्जा हटाने में किस वजह से देरी की जा रही है। संजीव का कहना है कि वहां तहसीलदार भी मौजूद थे। डीएम ने तहसीदार से जवाब तलब किया, लेकिन तहसीलदार वो समझाने में सफल हो गए जो नहीं होना चाहिए। फिलहाल यह मामला अटका हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी हैरानी 67-1 के तहत सतबीर के पुत्र गौरव पर तहसीलदार के यहां मुकदमा लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई ना किया जाना है। गौरव ने जमीन के इस टुकड़े को किसी नलनी नाम की महिला से क्रय किया दिखाकर रजिस्ट्री करा ली है। सबसे बड़ी बात तो यह कि सरकारी जमीन पर रजिस्ट्री कैसे किसी प्राइवेट महिला ने कर दी। यदि यह बात बाद मे अफसरों के संज्ञान में आ भी गयी तो उस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। संजीव का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर केवल खेल चल रहा है। वहीं दूसरी ओर तसहीदार निरंजन सिंह का कहना है कि जिस जमीन को लेकर सारा विवाद है उस पर हाईकोर्ट का स्टे अभी भी है।

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