एक दूसरे पर मौत बनकर टूट रहे ईरान USA

Shekhar Sharma
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खाड़ी स्थित अमेरिका के फौजी ठिकानों पर ईरानी की भारी मिसाइल हमले, अमेरिका ने भी ईरान के कई शहरों को बनाया निशाना

नई दिल्ली। ईरान ने खाड़ी देशों—जॉर्डन (प्रिंस हसन एयरबेस और अल मुआफक एयरबेस), बहरीन (शेख ईसा एयरबेस), और कुवैत (अली अल-सलेम एयरबेस)—में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का दावा है कि ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर किए गए हालिया भीषण हवाई हमलों के जवाब में किए गए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन कमांड सेंटरों, और ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव बढ़ गया है। जवाब में, अमेरिकी सेना ने भी ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, राडार साइटों और तटीय क्षमताओं को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए हैं। तनाव के इस उच्च स्तर के कारण, खाड़ी देशों में हवाई यातायात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है और सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिए गए हैं।

एक दूसरे पर हमले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। अमेरिकी हमलों ने ईरान के 9 प्रमुख शहरों—जैसे बंदर अब्बास, चाबहार, बुशेहर और शीराज—में वायु रक्षा प्रणालियों, रडार साइटों और ड्रोन कमांड सेंटरों को निशाना बनाया है। अमेरिका को जवाब देते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ओमान, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। ईरान का दावा है कि उसने अकाबा एयरपोर्ट पर खड़े अमेरिकी विमानों और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है।

अमेरिका को $113 बिलियन का नुकसान

ईरान के साथ जारी इस युद्ध (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) में अमेरिका को भारी मानवीय, सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और विभिन्न स्वतंत्र थिंक-टैंक के अनुसार, अमेरिका का अब तक का कुल वित्तीय नुकसान $113 बिलियन (लगभग ₹9.5 लाख करोड़) से अधिक हो चुका है।

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