राजनीतिक उपेक्षा, जातिगत आरक्षण और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई का एलान,
मेरठ। युवा ब्राह्मण समाज संगठन ने यूजीसी के विरोध का एलान किया है। इसको लेकर बुलायी गयी प्रेस वार्ता में संगठन के पुनीत शर्मा ने कहा कि सवर्ण समाज और विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ हो रहे निरंतर उत्पीड़न, राजनीतिक उपेक्षा तथा कुछ निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा कानूनों और अध्यादेशों की आड़ में किए जा रहे शोषण के विरुद्ध उनका संगठन कड़ा आक्रोश व्यक्त करता है। प्रेस वार्ता में मौजूद जितेन्द्र गौतम , कुलदीप शर्मा, पुनीत शर्मा, आनन्द शर्मा, पुष्पेन्द्र शर्मा, अजीत पचौरी, सुनील शर्मा, अजय शर्मा मनीष शर्मा विभिन शर्मा, पं, गणेश दत्त शर्मा, ललित शर्मा, हिमान्श शर्मा, प्रेमचन्द शर्मा, राजू शर्मा, अंकुर शर्मा आदि ने राजनीतिक दलों को खुली चेतावनी और सामाजिक बहिष्कार का ऐलान करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज को अब तक केवल ‘वोट बैंकÓ समझा गया है। नेता चाहे वह किसी भी पार्टी का नेता हो, यदि वह सवर्ण और ब्राह्मण समाज को महत्व नहीं देगा और समाज हित में नीतियां स्पष्ट नहीं करेगा, तो उसका पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। ब्राह्मण समाज अब स्वयं को पीड़ित और उपेक्षित महसूस करते हुए मौन नहीं रहेगा। समाज अब किसी भी दल का ‘बंधुआÓ बनकर कार्य करने को तैयार नहीं है। हमारा समर्थन केवल उसी को मिलेंगा, जो हमारे सम्मान और अधिकारों की बात करेगा।
महज दस साल की थी व्यवस्था
उन्होंने कहा कि केवल जातिगत आधार पर दिए जा रहे आरक्षण से कभी भी राष्ट्रहित संभव नहीं है। संविधान की मूल भावना की अनदेखी: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 वर्षों के लिए समाज के उत्थान हेतु किया था। परंतु आज पांच दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसका वास्तविक लाभ गरीब तबके को नहीं मिल रहा है। आरक्षण का लाभ एक वर्ग विशेष के कुछ गिने- चुने परिवारों (क्रीमी लेयर) तक सिमट कर रह गया है। गरीब आज भी गरीब है, जबकि सवर्ण समाज का गरीब युवा प्रतिभा होने के बावजूद अवसरों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन का संगठन पुरा समर्थन किया।


