संस्कृत शास्त्र परम्परा ही भारतीय ज्ञान परम्परा

Shekhar Sharma
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सीसीएसयू स्थित संस्कृतप्राच्यभाषा विभाग में संस्कृत सप्ताह महोत्सव का आरम्भ, व्याख्यान का आयोजन

मेरठ। सीसीएसयू स्थित संस्कृतप्राच्यभाषा विभाग में संस्कृत सप्ताह महोत्सव का आरम्भ किया गया। जिसके अन्तर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा विषयक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन हुआ। केन्द्रीय वि.वि. हिमाचल प्रदेश के भाषा संकायाध्यक्ष प्रो. बृहस्पति मिश्र मुख्यवक्ता तथा राजनीति विज्ञान, सीसीएसयू परिसर के सहविभागाध्यक्ष डा. मुनेश कुमार विशिष्ट अतिथि रहे। भारतीय आचार परम्परा के अनुसार मङ्गलाचरण एवं दीपप्रज्वलन के पश्चात् विभाग के प्राध्यापक डा. ओमपाल सिंह ने मधुर स्वर में सभी का शाब्दिक स्वागत किया। सहविभागाध्यक्ष डा. प्रशान्त शर्मा ने विषयप्रवर्तन करते हुए बताया कि भारत सरकार के निर्देश अनुसार सन् 1969 से श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाने की परम्परा का सूत्रपात हुआ। इसी दिन रक्षाबन्धन का पर्व मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा से पूर्ववर्ती तीन दिन तथा इससे परवर्ती तीन दिन, इस प्रकार यह समग्र 7 दिन संस्कृत सप्ताह के रूप में मनाये जाते हैं। डा. शर्मा ने बताया कि पण्डित बुद्धदेव विद्यालंकार के अनुसार प्राचीन भारतीय परम्परा में समाज में जिन्होंने ज्ञान के माध्यम से समाज के अज्ञान को दूर करने का व्रत धारण किया, वे विद्याव्रती लोग अपने गुण कर्मानुसार ब्राह्मण कहलाए। वैदिक परम्परा के अनुसार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विद्यारम्भ व वेदारम्भ संस्कार कराया जाता था। इसी कारण इस दिन को भारत सरकार ने संस्कृत दिवस के रूप में घोषित किया। मुख्य वक्ता प्रो. बृहस्पति मिश्र ने कहा कि प्राचीन शास्त्रों एवं विद्याओं का माध्यम संस्कृत भाषा है। गणित, विज्ञान, भूगोल, खगोल, इतिहास, राजनीति, चिकित्साशास्त्र, नाट्यशास्त्र आदि सभी विद्याओं के प्राचीन शास्त्र इसी भाषा के माध्यम से लिखे गए हैं। इसी लिये संस्कृत शास्त्र परम्परा ही भारतीय ज्ञान परम्परा है। श्रीकृष्ण से बडा राजनीति का वेत्ता कौन है? चाणक्य आदि भारतीय आचार्यों के शास्त्र ही आधुनिक राजनीति विद्या के वास्तविक आधार हैं। विशिष्ट अतिथि डा. मुनेश कुमार ने प्राचीन एवं अर्वाचीन के समन्वय पर बल दिया। उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिकों, दार्शनिकों को ऋषि शब्द से सम्बोधित किया। व्याख्यान के अन्त में विभागीय प्राध्यापक डा. नरेंद्र कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करने के क्रम में अखण्ड भारत एवं उसके इतिहास की चर्चा की। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:Ó इस शान्तिश्लोक के साथ यह व्याख्यान का कार्यक्रम पूर्ण हुआ।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में डा. सन्तोष कुमारी, डा. विजय बहादुर, श्री तुषार गोयल समेत संस्कृत विभाग तथा राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। श्री साहिल तरीका, सुमित शर्मा, बबलू समेत विभागीय कार्यालय के लोगों का विशेष सहयोग रहा।

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