राहुल की छात्रों की गूंज में उलझी भाजपा

Shekhar Sharma
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कांग्रेस इसे युवाओं की वास्तविक ‘गूंज’ के सामने सरकार की लाचारी बता रही है, तो वहीं भाजपा इसे ‘झूठ की दुकान’ बता रही है

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भाजपा उलझ कर रह गयी है। भाजपा नेता भी मान रहे हैं कि छात्रों की गूंज को लेकर डेमेज कंट्रोल करने भारी पड़ रहा है। इसके साइड इफैक्ट ने नुकसान तय माना जा रहा है। जमीनी स्तर पर यह मुकाबला इस बात का है कि युवाओं का भरोसा किस पर बनता है। कांग्रेस इसे युवाओं की वास्तविक ‘गूंज’ के सामने सरकार की लाचारी बता रही है, तो वहीं भाजपा इसे ‘झूठ की दुकान’ पर लगाम लगाने की अपनी रणनीति के रूप में पेश कर रही है। वेबसाइट के अनुसार, राहुल गांधी ने दावा किया था कि नौकरी ढूंढने वाले प्रत्येक 1,000 युवाओं में से केवल 36 को स्थायी नौकरी मिलती है और लगभग 700 गिग वर्कर (अस्थायी कर्मचारी) बन जाते हैं। कांग्रेस समर्थक और राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि राहुल गांधी ने जो भी बातें कहीं, वे नीति आयोग और अन्य सरकारी विभागों की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। उदाहरण के लिए, देश में स्कूल बंद होने या बेरोजगारी दर के जो आंकड़े राहुल गांधी ने दिए, वे सरकारी दस्तावेज ही दर्शाते हैं।

आमने सामने भाजपा कांग्रेस

तकनीकी रूप से, दावों के ‘झूठ’ होने की बात भाजपा समर्थित खेमे और एक स्वतंत्र बताने वाली फैक्ट-चेक वेबसाइट द्वारा उठाई गई है, जबकि कांग्रेस इन सभी आरोपों को गलत और अपनी बात को पूरी तरह प्रामाणिक मानती है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढी सहित अन्य नेताओं का कहना है कि यह वेबसाइट भाजपा की ही ‘मित्र मंडली’ या आईटी सेल का प्रोपेगेंडा है, जिसका मकसद राहुल गांधी की मुहिम की सफलता से ध्यान भटकाना है। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) अभियान में दिए गए बयानों को लेकर ‘झूठ’ होने या न होने का दावा पूरी तरह से एक बड़े राजनीतिक और डिजिटल विवाद में बदल चुका है। भाजपा समर्थक मानी जाने वाली इंटरनेट पर सामने आई एक अनामी फैक्ट-चेक वेबसाइट ने उनके दावों को गलत ठहराया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के आंकड़े पूरी तरह सही और सरकारी रिपोर्टों पर आधारित हैं।

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