मोदी के मुकाबले राहुल ब्रांड में तब्दील

Shekhar Sharma
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भारत जोड़ों यात्रा, मोहबत की दुकान, छोटे तबके के लोगों के बीच अचानक पहुंचा जाना और अब छात्रों की गूंज कार्यक्रमों ने राहुल को बनाया ब्रांड

नई दिल्ली। एक बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी राहुल गांधी को पप्पू साबित नहीं किया जा सका, हां राहुल ने खुद को एक इंटरनेशनल ब्रांड के रूप में जरूर स्थापित कर लिया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले अपनी राजनीतिक छवि और जनस्वीकृति में एक बड़ा बदलाव ज़रूर लाया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक एक नए ‘ब्रांड’ के रूप में देखते हैं। इतना ही विपक्षी दलों के बीच उनकी स्वीकार्यता पहले से काफी बढ़ी है, जबकि मोदी को लेकर अब भाजपा में दवे हुए ही लेकिन विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और उसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) की भूमिका संभालने के बाद राहुल गांधी की छवि एक ‘गंभीर राजनेता’ के रूप में उभरी है। राहुल गांधी अब संसद और चुनावी मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के खिलाफ सीधे और आक्रामक तेवर के साथ नजर आते हैं।

विपक्ष का नेतृत्व

राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर विपक्ष में अब कोई हिचक जैसी स्थिति नहीं है। हालांकि केवल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन को एकजुट कर आगे बढ़ाने की क्षमता ही यह तय करेगी कि यह ‘ब्रांड’ कितना मजबूत होता है। विपक्ष का नेतृत्व केवल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन को एकजुट कर आगे बढ़ाने की क्षमता ही यह तय करेगी कि यह ‘ब्रांड’ कितना मजबूत होता है।

भाजपा का डर

भारतीय राजनीति में यह बहस बेहद आम है कि क्या भाजपा राहुल गांधी से डरती है या नहीं। कांग्रेस और विपक्षी दलों का दावा है कि राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा असहज है, जबकि भाजपा का तर्क है कि वह राहुल गांधी से डरती नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक समझ और बयानों पर सवाल उठाती है। राहुल गांधी लगातार रोजगार, आर्थिक असमानता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। हाल ही में उनके ‘छात्रों की गूंज’ जैसे अभियानों और जन-संवाद कार्यक्रमों को मिल रहे समर्थन से भाजपा राज्यों में जवाबी कार्यक्रम करने पर मजबूर हुई है।पूर्व में भाजपा ने राहुल गांधी की जो ‘कमजोर’ छवि प्रचारित की थी, वह ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद बदल चुकी है। अब वे एक गंभीर और सीधे टक्कर लेने वाले नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं।

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