इस दिन काल भैरव की पूजा करने से राहु-केतु और शनि दोष से मुक्ति मिलती है
मेरठ। 9 अप्रैल 2026 को मुख्य रूप से मासिक कृष्ण जन्माष्टी और वैशाख कृष्ण अष्टमी/कालाष्टी का व्रत रखें। इस दिन काल भैरव की पूजा करने से राहु-केतु और शनि दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। इस दिन भगवान विष्णु (कृष्ण अवतार) और भगवान शिव (काल भैरव) की विशेष पूजा की जाती है। अष्टमी तिथि 9 अप्रैल की रात से शुरू होकर 10 अप्रैल तक रहेगी, इसलिए पूजा का मुख्य समय 9 अप्रैल की रात माना जाएगा। यह व्रत भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस दिन कृष्ण भक्त उपवास रखते हैं और रात में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 को रात 9:18 बजे से शुरू हो रही है, इसलिए कालाष्टमी का व्रत और भगवान कालभैरव की पूजा 9 अप्रैल की रात में करना अत्यंत फलदायी है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव की पूजा करने से राहु-केतु और शनि दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।
महादेव का उग्र रूप काल भैरव
। वे पाप, अज्ञानता और भय का विनाश कर भक्तों की रक्षा करते हैं। शिव पुराण के अनुसार, उन्होंने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए यह रूप धारण किया था, और वे मुख्यतः श्मशान में निवास करते हैं। कालाष्टमी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव समय के स्वामी और दंडाधिकारी देवता हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें हर प्रकार के संकट से मुक्त करते हैं। बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन वैशाख माह में आने वाली कालाष्टमी का विशेष महत्व होता है।


