बंदरगाहों की नॉकाबंदी को लेकर आरपार के मूड में, यूएस नेवी को तुरंत खाड़ी छोड़ने की दी चेतावनी
्नरई दिल्ली। ईरानी एयरफोर्स कमांडर माजिद माेसाबी ने आज सुबह कहा है कि यदि अमेरिका व इजरायल ने दोबारा से ईरान पर हमले की गलती की तो उन्हें दर्दनाक हालात का सामाना करने के लिए तैयार रहना होगा। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना को फारस की खाड़ी छोड़ देनी चाहिए। अमेरिका भले ही एक तरफा लड़ाई खत्म करने की बात कर चुका हो, लेकिन मिडिल ईस्ट के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। चंद घंटे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर मोरतजा खामनेई ने बयान जारी किया है कि अमेरिका को तुरंत खाड़ी छोड़ देनी चाहिए। ईरानी बंदरगाहों की नॉकाबंदी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी प्रकार की गलतफैमी अमेरिका पाले हुए है तो फिर यद्ध करे। ईरानी चेतावनी केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है यह चेतावनी इजरायल को भी दी गयी है। इसके बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से आसामनों से बारूदी बारिश की आहट सुनाई देने लगी है। युद्ध के बादल गरजते साफ सुनाई देने लगे हैं। हालांकि अभी अमेरिका की प्रतिक्रिया ईरानी चेतावनी पर नहीं आयी है।
स्ट्रेट हार्मूज बड़ी वजज
ईरानी कब्जे वाले जल मार्ग स्ट्रेट हार्मूज से कारोगोशिप्स की स्वतंत्र आवाजाही के लिए अमेरिन नेवी ने खाड़ी में डेरा डाला हुआ है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी भी जारी है। बंदरगाहों की घेराबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी कुछ भरपाई के लिए स्ट्रेट हाेर्मूज पर टोल नॉका लगाया गया है, हालांकि ईरान इसको काफी नहीं मानता है। उसको अपने सभी बंदरगाह नॉकाबंदी मुक्त चाहिए। अमेरिका यदि और पीछे हटाता है जैसे कि उम्मीद की जा रही है तो दुनिया खासतौर से मिडिल ईस्ट में जहां उसकी साख संकट में है और बुरी स्थिति का सामना उसको करना होगा। वैसे भी खाड़ी के तमाम देश ऐसे हैं जो अब अमरेिका पर अपनी सुरक्षा को लेकर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
ईरान के फ्रंटफुट और यूएस के बैकफुट की वजह
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम को लेकर बीते अप्रैल माह में जो कुछ नाटकिय घटनाक्रम दुनिया ने देखा और फिर एकाएक ईरान का अमेरिका से बातचीत खत्म कर दिए जाने का एलान कर दिया जाना और उसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का मास्को पहुंचना। प्रेसिडेंट ब्लादीमिर पुतिन से उनकी लंबी मुलाकातें इन तमाम घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इसको लेकर यूएस को भी क्लीनचिट नहीं दी जा सकती। यूएस के वार्ताकारों पाकिस्तान की मार्फत हर बार नई शर्तें सौगात में ईरान को थमा देते।
एटमी प्रोग्राम से बड़ा स्ट्रेट होर्मूज
यूएस और ईरान के बीच बातचीत के टूटने की बड़ी वजह ईरान का एटमी प्रोग्राम ना होकर स्ट्रेट होर्मूज को बताया जा रहा है। पश्चिम मीडिया में इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप को कठोर आलोचना की जा रही है। खुद अपने देश के लोग याहां तक कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटस सदस्य तक कहने लगे हैं ट्रंप की एक गलती ने ना केवल खरबों डॉलर में अमेरिका को खरीदा हुआ युद्ध थोपा बल्कि दुनिया में महंगाई का बूम भी ट्रंप की गलत नीतियों की देन है। इस बीच आज सुबह ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को खाड़ी छोड़ देने की धमकी का दिया जाना मिडिल ईस्ट की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है।


