ताजा हमलों ईरानी मिसाइलों का कहर

Shekhar Sharma
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स्ट्रेट होर्मूज से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को बनाया जा रहा है निशाना, खाड़ी के कई देशों पर ईरान के हमले जारी

नई दिल्ली। ईरान ने पिछले दो दिनों में मुख्य रूप से स्ट्रेट होर्मूज (Strait of Hormuz) में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक तेल टैंकर को निशाना बनाया है। यूएई की सरकारी तेल कंपनी के इस जहाज पर ईरानी मिसाइल से हमला किया गया। इसके साथ ही, ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने ईरान के परोक्ष सहयोग से सऊदी अरब के जीजान (Jizan) में स्थित अरामको (Saudi Aramco) तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया है। स्ट्रेट होर्मूज से गुजर रहे यूएई के एक कमर्शियल तेल टैंकर पर ईरान ने मिसाइल दागी, जिसकी यूएई ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खतरा बताते हुए कड़ी निंदा की है। इसके अलावा ईरान के करीबी सहयोगी हुथी लड़ाकों ने सऊदी अरब के जीजान में एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया। हालिया सैन्य तनाव के दौरान कुवैत में अमेरिका द्वारा संचालित एक सैन्य अड्डे (जहां अमेरिकी सैनिक और युद्ध सामग्री मौजूद थी) को भी निशाना बनाया गया है।

ईरान की यूएस को दो टूक

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट होर्मूज को तब तक नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका उसकी सभी शर्तें (जैसे युद्ध के नुकसान का मुआवजा और प्रतिबंध हटाना) पूरी नहीं कर देता।

अमेरिका नजर आता है बेबस

ईरान को रोकने में अमेरिका बेबस नजर आता है। अमेरिकी नौसेना की रीढ़ मानी जाने वाली टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों का वैश्विक स्टॉक भी करीब आधा समाप्त हो चुका है, जिसे दोबारा भरने में उत्पादन दर के हिसाब से वर्षों का समय लग सकता है। ईरान के साथ जारी इस भीषण युद्ध ने अमेरिकी मिसाइल भंडारों पर अभूतपूर्व दबाव डाल दिया है और खाड़ी क्षेत्र के समीकरण बदल दिए हैं।

खौफ में खाड़ी के देश

ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट गहरा गया है, जहां ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने खाड़ी देशों में भारी असुरक्षा पैदा कर दी है और अमेरिकी रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) पर भारी दबाव डाल दिया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों—विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और कुवैत—को ईरान और उसके सहयोगी हुथी विद्रोहियों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी सेना के अत्यधिक प्रयासों के बावजूद, क्षेत्र में ईरान की आक्रामक कार्रवाइयों को पूरी तरह से रोक पाना वाशिंगटन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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