
15 मई को गुमशुदगी दर्ज करने के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठी रही पुलिस, 17 को गन्ने के खेत से मिली ललिता की लाश
मेरठ। ललिता ने पहले ही बता दिया था कि उसकी हत्या कर दी जाएगी, लेकिन मेरठ पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। यदि पुलिस ने ललिता की बात को गंभीरता से लिया होता तो शायद उसकी हत्या नहीं होती। इतना ही नहीं बीए की छात्रा दलित युवती ललिता गौतम की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। उसकी तलाश का कोई प्रयास नहीं किया। पुलिस ने यदि तलाश का प्रयास किया होता तो शायद ललिता आज अपने परिवार के बीच होती, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया नतीजा यह हुआ कि गैंग रेप की बाद उसकी हत्या कर दी गयी। परिजनों ने ललिता की गुमशुदगी 15 मई को दर्ज करायी थी। गुमशुदगी दर्ज करने वाली टीपीनगर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। आरोप है कि पुलिस ने ललिता को तलाश करने का कोई प्रयास नहीं किया। 17 मई को जंगल से ललिता की लाश मिली। गैंग रेप के बाद आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी थी। जिन पुलिस वालों की लापरवाही के चलते वारदात को अंजाम दिया गया उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। वहीं दूसरी ओर पुलिस वैन में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर एसएसपी के चांटों ने इस मामले को लेकर नेशनल न्यूज बना दिया। इसी क्रम में आज ललिला के परिजन नई दिल्ली में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। सांसद इकरा हसन परिजनों को लेकर पहुंची थी। अखिलेश यादव ने परिजनों को दो लाख का चैक भी दिया। साथ ही सपा की सरकार बनने पर परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी का वादा किया। अखिलेश ने ललिता के पिता से कहा- उनकी बेटी को न्याय मिलेगा। सपा सरकार बनने पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देंगे। उन्होंने मेरठ के एसएसपी अभिनाथ पांडेय पर तंज भी कसा। कहा- जिस पुलिस से न्याय की उम्मीद होती है, उसके ही अधिकारी अन्याय और अहंकार के थप्पड़ जनता के गाल पर मार रहे हैं। इसका वीडियो यूपी पुलिस की छवि को खंडित कर रहा। इससे आम जनता के प्रति संवेदनशील पुलिसकर्मी शर्मिंदा हैं। खिलेश ने X पर लिखा- जब वो खुद ही बेलगाम हैं, जिसके हाथ में लगाम है तो फिर उनका क्या, जो उनके दरबार में दरबान है। ‘मेरठ की बेटी’ के साथ महा-अत्याचार हुआ। नामजद आरोपियों पर कमजोर धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया गया, जबकि आंदोलनकारियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा लगाया गया। यह नाइंसाफी की पराकाष्ठा है। पीडीए अब सहेगा नहीं, कहेगा। सच तो ये है कि जिस राज्य का मुख्य ही महिलाओं के साथ, विशेष रूप से एक युवा मृतक की शोक-संतप्त मां से सरेआम अभद्रता का वाचन करे, उसकी पुलिस से कोई भी उम्मीद करना बेमानी है। मस्तिष्क का आदेश ही, उंगलियां मानती हैं। इकरा हसन ने कहा कि के एसएसपी के रवैये के बाद से पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ है। आज हम लोग सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले। पीड़ित परिजनों को एसएसपी ने जाति सूचक शब्द कहे। अहंकार की हदें पार की गईं। पहली बार किसी आईपीएस अफसर ने इस तरह की गुंडागर्दी की है। ऐसे अफसरों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर ना तो सरकार और ना ही भाजपा संगठन अब तक एसएसपी को बचाने के मूड में नजर आ रहे हैं। जिसके चलते माना जा रहा है कि अविनाश पांडे को मेरठ से हटाया जा सकता है।
चारों ओर से हमले
दलित छात्रा की हत्या मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस वैन में बंद कर चांटों की घटना के बाद एसएसपी अविनाश पांडे मीडिया और राजनीतिक हमलों की जद मे आ गए हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के अलावा, पूर्व सीएम मायावती, भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, किसान नेता संजीव तोमर, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने एसएसपी मेरठ चांटे वाले उनके वायरल वीडियो को लेकर कठोर टिप्पणी की है। असपा के चंद्रशेखर पीड़ित परिवार से मिले भी।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें
पुलिस वैन में चांटे बरसाते वाले वीडियो की वजह से ही एसएसपी मेरठ की मुश्किलों के बढ़ने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता। मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के डीजीपी से जवाब तलब किया है। कई पूर्व आईपीएस ने पुलिस वैन में बंद लोगों पर एसएसपी के चांटों की बारिश को गलत बताते हुए अविनाश पांडे के अचारण को अनप्रोफेशनल तक करार दिया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में विस्तृत शिकायत भेजी। शिकायत के साथ वीडियो भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। राज्य मानवाधिकार आयोग ने केस दर्ज करते हुए मामले की सुनवाई शुरू कर दी है इस मामले में सबसे ज्यादा बड़ा और गंभीर एलान किसान नेता संजीव तोमर है। जिन्होंने इस मामले में कार्रवाई ना होने पर एडीजी ऑफिस पर महा पंचायत का एलान किया है।
मेरठ जेल से शिफ्ट
ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट के गेट पर धरना, प्रदर्शन करने वाले 8 आरोपियों को मेरठ जेल से शिफ्ट कर दिया गया है। गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को मेरठ जिला कारागार से हटाकर प्रदेश की अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया है। रवि गौतम और लवी उर्फ शुभम को मुजफ्फरनगर जिला कारागार, दिग्विजय भाटी और हिमांशु सिद्धार्थ को बागपत जेल, रितिक और अंकित कुमार को बिजनौर जेल, जबकि नवनीत कुमार और अरविंद कुमार को गाजियाबाद की डासना जेल भेजा गया है। दूसरी ओर, प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और एसएसपी द्वारा प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया। राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) दोनों ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी से 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।


