
करोड़ों रुपए के चढावा चोरी मामले में पुलिस के द्वारा दर्ज मुकदमें में अभियुक्त ठहराए जाने के बाद विजय भंडारी को श्रीजी को चाबियां सौंपने की आयी याद
मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित पंचायती जैन मंदिर में करोड़ों रुपए के चढावा चोरी मामले में एक लंबी जांच के बाद पुलिस के द्वारा दर्ज किए गए मुकदमें में अभियुक्तों में शामिल विजय भंडारी को जब जेल की सलाखें नजर आने लगीं तो आनन-फानन में मंदिर जाकर श्रीजी के सामने चाबियां पटक दीं। साथ ही एक पत्र भी भगवान के नाम लिख दिया। विजय भंडारी इस पत्र में कह रहे हैं कि मैं पिछले कई सालों से मंदिर की व्यवस्था देख रहा था, लेकिन झुठे और फर्जी मुकदमें की वजह से अब मैं यह व्यवस्था नहीं देख सकता। मुकदमों को फर्जी बताकर विजय भंडारी सदर पुलिस के काबिल अफसरों या फिर क्राइम ब्रांच के अफसरों अथवा मेरी पुलिस के अफसरों की काबलियत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वो यह आरोप लगा रहे हैं कि मेरठ पुलिस फर्जी मुकदमे लिखती है। यह मुकदमा लंबी पड़ताल के बाद कायम किया गया जिसमें पुलिस ने अभियुक्तों में विजय सन्मति यानि विजय जैन भंडारी का नाम भी शामिल किया है। श्रीजी की प्रतिमा के समक्ष जो कुछ भी कृत्य किया गया है, वो कर किस को गुमराह किया जा रहा है। श्रीजी तो सब जानते हैं कि कौन क्या है और किसने क्या किया है। तो यह मान लिया जाए कि ऐसा कर सदर जैन समाज को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। सदर जैन समाज को ऐसा समझ लिया कि कुछ भी कृत्य करोगे और सदर जैन समाज को गुमराह कर दोगे। सदर जैन समाज के लोगों का साफ कहना है कि इस प्रकार के कृत्यों से अब कोई गुमराह नहीं होने वाला है। सदर जैन समाज के तमाम लोग सवाल पूछ रहे हैं कि करोड़ों रुपए का सोना चांदी और नकदी व दूसरा चढावा चोरी जब किया जा रहा था क्या तब श्रीजी नहीं देख रहे थे। मंदिर जी के जिस प्रकार से फर्जी चुनाव कराए गए। कई कई बार मांगे जाने के बाद भी डिप्टी रजिस्ट्रार को कोई खाता बही तक नहीं दिखाया गया। थाना सदर बाजार पुलिस और क्राइम ब्रांच वाले सैकड़ों बार हिसाब किताब मांगते रहे कहीं कुछ नहीं दिखाया जा रहा है, तो क्या यह मान लिया जाए कि अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए श्रीजी के सामने यह कृत्य कर जैन समाज को गुमराह किया जा रहा है। लेकिन सदर जैन समाज ने दो टूक कह दिया कि वो गुमराह होने वाले नहीं। सच और कानून का साथ देंगे। गवन किया है तो सलाखों के पीछे तो जाना ही होगा। अदालत में ट्रायल शुरू हो चुका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दो तीन माह के भीतर श्रीजी के मंदिर और कानून के द्वारा अभियुक्त बनाए गए सभी जेल की सलाखों के पीछे होंगे। यही सत्य है, इसके अलावा कुछ भी सत्य नहीं। श्रीजी के सामने जिस प्रकार का कृत्य किया गया है उससे सच नहीं छिप पाएगा। श्रीजी भी सत्य के साथ हैं असत्य के नहीं
किस को फंसने की है साजिश
मंदिर जी के स्वयं भू भंडारी होने और अयोध्या के श्रीराम मंदिर से ज्यादा बड़ी चढावा चोरी मामले के अभियुक्त बनाए जाने के बाद अब चाबियां श्रीजी के सामने रख दिए जाने के कृत्य के पीछे किस को फंसाने की साजिश मानी जानी चाहिए। जब मंदिर में कथित चढावा चोरी हो रही थी जब श्रीजी के सामने चाबियां रखने की याद क्यों नहीं आयी। फिर दूसरी बात यह कि जब तक मंदिर जी का एक-एक पाई का हिसाब दिए बगैर कैसे भगवान के पीछे छिपकर अपने गुनाहों पर पर्दा डाल सकते हो। यदि चाबियां ही सौंपनी थी तो पुलिस, क्राइम ब्रांच के अफसर या फिस जिस अदालत में मंदिर जी में चढावा चोरी का मुकदमा चल रहा है उस अदालत को चाबियां सौंपी जातीं। श्रीजी के नाम चिट्ठी लिखकर चाबियां वहां पटकर देना कितना ही प्रयास कर लीजिए जैन समाज अब गुमराह नहीं होन वाला है। मामला मंदिर जी में चढावा चोरी का है, इस प्रकार के कृत्य कर अपने गुनाहों पर पर्दा नहीं डाला जा सकेगा। और आखिर में और बता दीजिए की श्रीजी ने चिट्टी का जवाब क्या दिया है।


