कैंट बोर्ड के डोर टू डोर ठेके में घपले घोटालों का खुलासा करने वाले सचिन ने सदर में बांटे कई किलो लड्डू
मेरठ। रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचे गए डा. सतीश शर्मा अकेले नहीं है। कैंट बोर्ड के डोर टू डोर ठेके में पूर्व साझीदार सचिन गोयल निवासी सदर का आरोप है कि कैंट बोर्ड के अफसरों की कुंडली भी सीबीआई को खंगाली चाहिए। उन्होंने बताया कि डोर टू डोर ठेके में जितनी गड़बड़ियां और पैसों की धांधली की गयी हैं, वो चाहते हैं कि डोर टू डोर के ठेके में कैंट बोर्ड के अफसरों की भूमिका की भी जांच सीबीआई को करनी चाहिए ताकि वो भी सतीश शर्मा के साथ रहें। उन्होंने कहा कि कैंट बोर्ड में जितने भी घपले घोटाले हो रहे हैं वो जब
ज्वाइंट रूप से किए जाते हैं। कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को सीबीआई ने 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद क्षेत्रवासियों ने खुशी मनाते हुए लड्डू बांटे। छावनी परिषद ने उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए रक्षा मंत्रालय को पत्र भी जारी कर दिया है। इस मामले में गंगानगर निवासी बालाजी कांट्रेक्टर के विक्की ने कैंट बोर्ड से गांधी बाग की पार्किंग, एंट्री, कैंटीन और तहबाजारी का ठेका लिया था। डॉ. सतीश शर्मा ठेका निरस्त करने की धमकी देकर विक्की से 10 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। विक्की ने इसकी शिकायत सीबीआई में की थी।
खुशी मिली इतनी मन में ना समाए
डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को सीबीआई ने 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद सदर में लोगों ने या जो त्रस्त हैं उन्होंने खुशी मनाते हुए लड्डू बांटे। छावनी परिषद ने उनकी सदस्यता रद्द करने के लिए रक्षा मंत्रालय को पत्र भी जारी कर दिया है। डोर टू डोर ठेके के साझीदार ने कई किलो लड्डू सदर इलाके में बांट दिए। वहीं दूसरी ओर आरोप है कि पैसे ना मिलने पर सतीश शर्मा कैंट बोर्ड की ‘हथौड़ा टीम’ भेज देते थे। तमाम लोगों का कहना है कि वो सभी सतीश शर्मा से पीड़ित थे, लेकिन शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सीबीआई की कार्रवाई से कैंट निवासी सभी लोग खुश हैं।क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर भाजपा के जनप्रतिनिधि ही पीड़ित पर कार्रवाई करने की धमकी देते थे, जिस कारण सतीश चंद्र शर्मा बेखौफ होकर रिश्वत लेते थे। डा. सतीश अक्सर भाजपा के जिन लोगों के करीब नजर आया करते थे वो चुप्पी साधे हुए हैं। कुछ भी बोलने को तैयार नहीं। यहां यह भी बता दें कि डा. सतीश शर्मा का संघ से कनेक्शन जग जाहिर है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को भाजपा के ही लोग कमजोर कर रहे हैं।


