तीरगरान, कमला नगर, पंजाबी पुरा , महावीर जयंती , शारदा रोड के मन्दिरों में पहुंचे तो वहां श्रद्घालुओ की भीड उमड़ी
मेरठ। गुरुवर सौम्य सागर जी महाराज ने , तीर गरान, कमला नगर, पंजाबी पुरा , महावीर जयंती , शारदा रोड के मन्दिरों में पहुंचे तो वहां श्रद्घालुओ की भीड उमड़ी। सभी स्थानों पर पर महाराज जी ने प्रवचन किए, इसके बाद महाराज जी अपने विराजमान स्थान पर वापसी की। यहां पर भी सैकड़ो धर्मार्थी महाराज जी की देशना सुनने को व्याकुल व लालायित थें।मंच का संचालन इन्दौर से आई बहन सुधा मलैया ने किया।
आहार प्रेमपुरी में
गुरुवर सौम्य सागर जी महाराज का आहार पुरानी प्रेम पुरी में हुआ, और निश्चल सागर जी महाराज का आहार रानी मिल मे हुआ, महाराज जी ने लोभ से अति लाभ की तृष्णा को जहर व आग बताया, महाराज जी पीछी जो रखते है , वह जहा भी बैठते है उस जगह का परिमार्जन अथवा शुद्धि करके ही उस स्थान पर बैठते है कि कोई सुक्ष्म जीव जन्तु न मर जाए, पीछी जीव दया के लिए है, जीव रक्षा के लिए है, कुछ लोग कहते है ,महाराज जी पीछी लगा दो,आशीर्वाद दे दो , महाराज जी कहते है यह पीछी जीव दया की रक्षा का उपकरण है, यह आशीर्वाद के लिए नही है, हम कर्तृत्व भोक्तृत्व व स्वामित्व के बोध से बचे, स्वंय को कर्ता , भोक्ता का मानना व जो सम्पति आपकी नही है जो आपको छोड़कर जाना है उस पर अपना स्वामित्व व एकाधिकार मानना अज्ञानता है, अपेक्षाओ व उम्मीदो की दलदल मे मन का आत्मिक ह्रास न करे, सब यही छोड़कर जाना है, महाराज जी ने आहार दान की महिमामंडन किया कैसे भगवानआदिनाथ एक वर्ष तक आहार के बिना रहे और राजा श्रंयास को स्वप्न मे दिखा कि महाराज को गन्ने , सोम रस का आहार दिया, हम शुद्ध आहार बनाए और आहार की भावना भाए , अपने आत्म स्वरूप की सुध ले, सुख शांति सुकून चैन चाहिए तो अपेक्षाओ के लोभ की भंवर से बचे, श्री फल कही भी चढ जाता है, लेकिन यह शीश वीतरागी सन्तो पर ही झुकाए, मन के बाहरी बिखराव व आंतरिक फैलाव से खुद को बचाए, आत्म निरीक्षण व आत्मानुशासन के साथ जिए, सरधना जैन समाज व पल्लव पुरम जैन समाज के लोगो ने चातुर्मास के लिए श्रीफल चढाया, वीरेंद्र जैन, संजय कलश, राकेश संजय जी पंजाबी पुरा , सुनील प्रवक्ता, अनिल चेतन, व सकल जैन समाज के सभी गणमान्य लोग मौजूद रहे।


