युवाओं पर फिर किया गया बल प्रयोग, प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा और हिंसक झड़पें हुईं, अमित शाह का इस्तीफा मांगा
नई दिल्ली। जंतर मंतर पर आज एक बार फिर हालात बेकाबू हो गए। वहां भारी तनाव है और केंद्र ने बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की है। जंतर मंतर मुख्य धरना स्थल पर लोहे की दीवार खड़ी कर दी गयी हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन दिवारों को हटाने का प्रयास किया। वो जंतर मंतर के भीतर तक पहुंचना चाहते थे। उसी दौरान उन पर बल प्रयोग किया गया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और छात्र संगठनों के बैनर तले हजारों प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पर इकट्ठा होना शुरू हो गए हैं। सरकार द्वारा पूर्व में मांगें मानने के आश्वासन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह आंदोलन अस्थायी रूप से थम गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर ‘वादाखिलाफी’ और आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई का आरोप लगाते हुए फिर से मोर्चा खोल दिया है। उसके बाद झड़पें हुईं। केवल जंतर मंतर ही नहीं पूरी दिल्ली में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इन प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक हलचल तेज रही और सरकार विरोधी नारों तथा तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
सरकार पर मुकरने का आरोप
आंदोलन के नेताओं (जैसे अभिजीत दीपके) का कहना है कि समझौता होने के बावजूद पुलिस अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों को परेशान कर रही है और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर रही है। बर्बरता का दौर खत्म नहीं हुआ है। यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। छात्र संगठनों का आरोप है कि पिछले दिनों हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय के इशारे पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया और घायल छात्रों तक को प्रताड़ित किया।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग
शिक्षा सुधारों और NEET पेपर लीक पीड़ितों के मुआवजे के साथ-साथ अब प्रदर्शनकारी छात्र पुलिसिया दमन को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बर्बरता अमित शाह के इशारे पर की गयी है। जंतर-मंतर पर दोबारा बढ़ रही भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की भारी किलेबंदी कर दी है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड्स की ऊंचाई बढ़ा दी गई है और उन्हें आपस में वेल्ड कर दिया गया है ताकि पिछली बार की तरह स्थिति बेकाबू न हो सके। [1]


