अबकि बार ट्रंप सरकार फिर भी भारत पर ट्रैरिफ थोप रहे ट्रंप

Shekhar Sharma
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भारत पर इस बार सौ फीसदी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा, आन लाइन पेमेंट पर सरकार की टैक्स वसूली को अमेरिकी प्रेशर है बताया जा रहा

नई दिल्ली। 100% टैरिफ बिल का प्रस्ताव (सितंबर 2026): हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ को 262-159 के अंतर से पारित किया है। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए हैं। भारत और चीन इसके मुख्य निशाने पर हैं। इससे पहले, फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके तहत अमेरिका ने अपने अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ को 50% से घटाकर 18% की गयीं।

अबकि बार ट्रंप सरकार

अबकि बार ट्रंप सरकार.. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार में पीएम मोदी का अबकि बार ट्रंप सरकार का नारा लगाना और ट्रंप को भारत का सच्चा दोस्त बताए जाने के बाद भी अमेरिका लगातार भारत पर टेरिफ थोप रहा है। इस बार सौ फीसदी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। साल 2019 में ह्यूस्टन में हुए ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी द्वारा डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में कहा गया यह वाक्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था। आलोचकों का तर्क है कि किसी दूसरे देश के आंतरिक चुनाव में इस तरह का झुकाव दिखाना कूटनीतिक जोखिम भरा हो सकता है। अमेरिका द्वारा भारत जैसे रणनीतिक साझेदार पर भी 100% टैरिफ का दबाव बनाना यह दिखाता है कि वाशिंगटन में ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की नीति भारत के साथ दोस्ती से ऊपर रखी जा रही है। आलोचकों के अनुसार, रूस से सस्ता तेल खरीदने की भारत की नीति पर अमेरिका का यह कड़ा रुख भारतीय अर्थव्यवस्था और कूटनीति पर सीधा दबाव है, जिसे पूरी तरह टालने में मौजूदा नीति पूरी तरह सफल नहीं रही।

अमेरिका को लेकर विफल पीएम मोदी

आलोचकों का मानना है कि पीएम मोदी अमेरिका को भारत विरोधी आर्थिक नीतियां बनाने या भारत पर 100% टैरिफ लगाने का दबाव बनाने से नहीं रोक पाना तो कूटनीति का यह हिस्सा इस समय विफल या बेहद कमजोर साबित हुआ है। व्यक्तिगत दोस्ती और ‘हाउडी मोदी’ जैसे बड़े आयोजनों के बावजूद अमेरिका ने भारत की ऊर्जा मजबूरियों को दरकिनार कर अपने आर्थिक हितों को ऊपर रखा है। अमेरिका को पूरी तरह प्रभावित करने या झुकाने के नजरिए से देखते हैं, तो भारतीय कूटनीति विफल रही है। मजबूती को दर्शाता है।

भाजपा की सफाई

भारत पर सौ फीसदी टैरिफ और अबकि बार ट्रंप सरकार के नारे को लेकर विपक्ष के निशाने पर पीएम मोदी का बचाव करते हुए भाजपाइयों का कहना है कि अमेरिका में भारत के साथ संबंधों को केवल डोनाल्ड ट्रंप या रिपब्लिकन पार्टी तक सीमित नहीं देखा जा सकता। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों ही दल चीन का मुकाबला करने के लिए भारत को एक अनिवार्य साझेदार मानते हैं। यह विधेयक किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अमेरिकी संसद का संस्थागत फैसला है। यह पहली बार नहीं है जब भारत पर अमेरिकी प्रतिबंधों (जैसे CAATSA) का खतरा मंडराया हो। विशेषज्ञों का कहना है कि 100% टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति ट्रंप को एक ‘मोलतोल के हथियार’ (Leverage) के रूप में दिया गया है, जिसका उपयोग वे व्यापार वार्ताओं में रियायतें पाने के लिए कर सकते हैं, न कि सीधे संबंध तोड़ने के लिए। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई भी रिश्ता स्थायी दोस्ती या दुश्मनी पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित होता है। यह विधेयक भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक हितों के टकराव को दर्शाता है, जिससे निपटने के लिए भारतीय कूटनीति फिलहाल बातचीत का रास्ता अपना रही है।

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