भंडारी को किसने किस हैसियत से दीं चाबी

Shekhar Sharma
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बड़ा सवाल सदर दुर्गाबाड़ी जैन मंदिर की चाबियां अब कौन और किस हैसियत से संभालेगा जबकि भंडारी समेत कमेटी के सभी 9 पदाधिकारी चढ़ावा चोरी के अभियुक्त

मेरठ। सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन मंदिर के भंडार गृह जहां अकूत संपत्ति होने की चर्चा सदर जैन समाज में आम है, वहां की चाबियां क्यों मारी-मारी फिर रही हैं। अभियुक्तों में शामिल विजय जैन सनमति ज्वैलर्स ने श्रीजी के सामने जिस प्रकार से चाबियाें को पर्चा लिखकर पटक दिया गया है, उसके बाद यदि भंडारगृह में खुदा ना खास्ता कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। इससे भी बड़ी बात यह कि भंडारी बनाया किसने थे और मंदिर जी के भंडारगृह की ये चाबियां सौंपी किसने और किस हैसियत से सौंपी थीं। क्योंकि मंदिर जी की कोई कमेटी तो थी ही नहीं। यदि मंदिर जी की कोई कमेटी होती तो रंजीत जैन, मृदुल जैन, सुनील जैन, सुशील जैन, अनिल जैन बंटी, विजय भंडारी, दिनेश जैन आदि के खिलाफ क्यों तो थाना सदर बाजार पुलिस एफआईआर दर्ज करती और क्यों क्राइमब्रांच इतनी लंबी जांच करती। यहां यह भी याद रखा जाना जरूरी है कि जिनको पुलिस ने अभियुक्त बनाया है क्राइम ब्रांच की जांच में उन्होंने कथित रूप से अपना गुनह स्वीकार किया है। उन्होंने माना है कि मंदिर की कोई कमेटी थी ही नहीं। मंदिर पर कब्जा करने के लिए फर्जी चुनाव कराएने के लिए जो साइन किए गए वो उन्हीं के हैं। जब मंदिर की कमेटी ही फर्जी थी तो फिर मंदिरजी की चाबियां भंडारी को किसने सौंप दी। इस सवाल का उत्तर सदर जैन समाज ही नहीं पूरे मेरठ के जैन समाज को चाहिए। जो कुछ हुआ और किया जा रहा है वह आहत करने वाला है।

सबसे बड़ा सवाल

सदर दुर्गाबाड़ी मंदिर जी से श्रीजी की सवारी निकाली जानी है। श्रीजी की सवारी में किसी प्रकार की बाधा किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं। श्रीजी की भव्य शोभयात्रा श्रद्धा और लोगों की भावना से जुड़ी है। लेकिन बजाए भव्य शोभायात्रा संपन्न कराने जिस प्रकार से चाबियां दी गयी हैं उसके बाद यह भी सवाल पूछा जा रहा है कि अब चाबियां संभालेगा कौन, यह सवाल इसलिए भी पूछा जा रहा है क्योंकि अवैध रूप से मंदिर पर काविज होने के लिए कुटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में तो रंजीत जैन, मृदुल जैन, सुनील जैन, सुशील जैन, अनिल जैन बंटी, विजय भंडारी, दिनेश जैन आदि को अभियुक्त बना दिया है। दसलक्षण पर्व शुरू हो चुके हैं। सदर जैन समाज यही चाहता है कि श्रीजी की शोभायात्रा पूरी भव्यता के साथ परंपरागत श्रद्धा व उत्साह के साथ निकाली जाए। शोभायात्रा को भव्य बनाने में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रह जानी चाहिए। सदर जैन समाज तो शोभयात्रा के लिए दोनों हाथों को हमेशा ही खोले रहा है, लेकिन जो कुछ मंदिरजी की कमेटी और चढ़ावा चोरी मामले के बाद सामने आया है वो जरूर मेरठ के जैन समाज को आहत करने वाला है।

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