कौन बनेगा कैंट बोर्ड का मनोनीत सदस्य

Shekhar Sharma
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कोरम पूरा था सो हो गयी कैंट बोर्ड की बैठक, कई मुद्दों पर चर्चा, डा. सतीश शर्मा की अरेस्टिंग के बाद कई भाजपाई चेहरे कतार में, कौन बनेगा कैंट बोर्ड का मनोनीत सदस्य

मेरठ। सीबीआई के हाथों बुक कर लिए गए सतीश शर्मा के बाद कैंट बोर्ड का अगला मनोनीत सदस्य कौन होगा यह सवाल भी लगे हाथों पूछा जाने लगा है। कैंट बोर्ड के मनोनीत नए सदस्य के नाम तक जहां तक सवाल है तो भाजपाइयों के लिए रिश्वत लेते हुए डा़ सतीश शर्मा की गिरफ्तारी किसी जख्म सरीखी है। सीबीआई की कार्रवाई को लेकर पूछे जाने वाले सवालों से भाजपा नेता कन्नी काट रहे हैं। हालांकि दूसरी ओर यह भी सच है कि ऐसे नामों की कमी नहीं जिनको लेकर कहा जा रहा है कि वो सताए हुए हैं और जो कुछ हुआ उसको लेकर अब कहा जा रहा है कि जो कुछ हुआ ठीक ही हुआ। कुछ ज्यादा ही अंत की उतारी हुई थी। जो कुछ चल रहा था वो कम से कम संघ और भाजपा की परंपरा कभी नहीं रही है। संघ में तो इस प्रकार की चीजे किसी सूरत भी स्वीकार्य नहीं। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि डा़. सतीश शर्मा के बाद अब कैंट बोर्ड का नया सदस्य कौन हो सकता है।

कोरम पूरा तो बोर्ड की बैठक

कैंट बोर्ड की बैठक से चंद घंटे पहले मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा की अरेस्टिंग के बाद सवाल उठ रहे थे कि बोर्ड की बैठक जिसमें गिरफ्तारी से जुड़े पार्किग के ठेके के मामला भी तय होना है, वह होगी या नहीं, लेकिन कोरम पूरा था इसलिए बोर्ड की बैठक में कोई तकनीकि दिक्कत नहीं हुई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मेरठ भाजपा के तीन बड़े चेहरे राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद अरुण गोविल और कैंट विधायक लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस बैठक में पहुंचे थे।

बोर्ड के कामकाज का अधिकारियों से बेहतर हो अनुभव

भाजपा ही नहीं बल्कि कैंट के बांशिंदों का भी कहना है कि कैंट बोर्ड में मनोनीत सदस्य वहीीं बनाया जाना चाहिए जिसको कैंट बोर्ड के नियम कायदों की जानकारी हो। जो बोर्ड की पूर्व बैठकों में पब्लिक की आवाज पूरजोर तरीके से उठाता रहा हो और जो आसनी से और सर्व सुलभ हो। बोर्ड के कायदे कानूनों की जानकारी रखने के चलते जिसकी फौजी अफसरों पर भी अच्छी पकड़ हो। ऐसा ही कोई नाम जिसको कैंट बोर्ड के कामकाज का अच्छा खासा और लंबा अनुभव हो, सरकार को बोर्ड का सदस्य बनाया चाहिए भले ही वो कोई महिला ही क्यों ना हो। दरअसल यदि सीबीआई की कार्रवाई और डा. सतीश शर्मा की अरेस्टिंग से इतर भी बात की जाए तो लोगों का सबसे गंभीर आरोप यही है कि पब्लिक की नुमाइंदगी के नाम पर डा. सतीश शर्मा का मनोनयन किए जाने के बाद भी पब्लिक की आवाज उठाने वा सुनने वाला वहां कोई नहीं था। पब्लिक के काम के नाम पर जो कुछ भी चल रहा था उसको बड़ा पार्ट बैकडोर से बताया जा रहा है। आम जन केवल चक्कर काटने के अलावा कुछ ज्याद नहीं कर पा रहा था। यह शिकायत केवल छावनी के आम वाशिंदो ंतक नहीं है बल्कि इस प्रकार की बाते करने वालों में भाजपाइयों की बड़ी संख्या है। भाजपा का आम कार्यकर्ता की यदि बात करें तो वो भी यही चाहते हैं कि डा. सतीश शर्मा के प्रकरण से पार्टी को हुए डेमेज को कंट्रोल करने के लिए संगठन और सरकार को जितनी जल्दी हो सके नए किसी ऐसे शख्स या महिला को मनोनय करना चाहिए जिसको बोर्ड के कामकाज का अधिकारियों से बेहतर अनुभव हो।

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