कैंट बोर्ड हाईकोर्ट की अवमानना के दायरे में, कोर्ट के आवासीय बंगले को मूल स्थिति में लाने के हैं आदेश
मेरठ। हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद रंगसाज मोहल्ला (बाेम्बे बाजार) स्थित बंगला 176 कैंट बोर्ड की फाइलों में भले ही सील हो, लेकिन मौके पर बाजार आबाद हो गया है। इसमें अवैध रूप से बनायी गयी दुकानों में कई बड़े शोरूम खुल गए हैं। मौके पर बंगला 176 का स्टेटस पूरे कैंट बोर्ड को हाईकोर्ट की अवमानना का कसूरवार ठहराने के लिए पर्याप्त है। यह भी जानकारी मिली है कि इस बंगले के अभी के स्टेटस को लेकर कैंट बोर्ड के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना का वाद दायर करने की तैयारी कर ली गयी है। यदि अवमानना का वाद दायर होता है तो यह कैंट बोर्ड अफसरों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है। केवल कैंट बोर्ड के अफसर ही नहीं फाइलों में सील इस बंगले में जो भी व्यापारी जिदंगी भर की कमाई लगाकर यहां शोरूम खोल रहे हैं उनके लिए भी मुसीबत तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी ओर मौके के स्टेटस की यदि बात की जाए तो ग्राउंड फ्लोर की तमाम दुकानें जो सील हैं, वहां तमाम प्रकार के प्रतिष्ठान खुल गए हैं।
यह है पूरा मामला
छावनी के रंगसाज मोहल्ला स्थित ओल्डग्रांट का बंगला जीएलआर में राजकुमारी जैन समेत कुल सात लोगों के नाम चढ़ा हुआ है। यह आवासीय बंगला पैलेस सिनेमा जहां वर्तमान में इम्युनिटी मॉल बन गया है उसके ठीक सामने है। साल 2006 में इस बंगले में बड़े स्तर पर कराए गए अवैध निर्माणों के चलते तत्कालीन सीईओ जेएस माही ने पीपीई एक्ट चलाया था। जिसमें बंगले के अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश किए गए। कैंट बोर्ड के आदेशों के खिलाफ विपक्षी डिस्ट्रिक कोर्ट गए लेकिन उन्हें वहां कोई राहत नहीं मिली। बाद में वो कैंट बोर्ड के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। लेकिन हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
यह कहा हाईकोर्ट ने आदेश में
हाईकोर्ट के जस्टिस देवी प्रदसाद आदेश में कहा गया है कि रंगसाज मोहल्ला स्थित बंगला 176 को उसके मूल स्वरूप में लाया जाए। इतना ही नहीं आदेश में यह भी कहा गया कि अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई को लाइव चलाया जाए, हाईकोर्ट उसको चैनल की मार्फत इलाहाबाद में ही बैठकर लाइव देखेगा। साल 2008 में 176 में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्कालीन सीईओ केसी गुप्ता ने करायी। इसको लेकर काफी हो हल्ला भी मचा था। कार्रवाई के बाद बंगला सील कर दिया गया।
सामान निकालने को खुली थी सील
कैंट बोर्ड की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान तमाम ऐसे दुकानदार थे जिनका सामान दुकानों में ही रह गया था और बाहर सील लगा दी गयी थी। बाद में दुकानदारों के आग्रह किए जाने पर कैंट बोर्ड ने सील खुलवायी थी और तब कहीं जाकर दुकानदारों का सामान निकलवाया जा सका। सामान निकलवाए जाने के बाद वहां कैंट बोर्ड ने दोबारा सील लगा दी थी। बंगला 176 पर कैंट बोर्ड की फाइलों में आज भी सील बादस्तूर जारी है।


