सीएम योगी के सड़कों को लेकर आदेश मेरठ में लागू नहीं क्या

Shekhar Sharma
6 Min Read

बीते शुक्रवार को पीडब्लूडी अफसरों को पूरी तरह से डेमेज हो चुकी सड़कों को लेकर नसीहत देते हुए लगायी थी फटकार, उसके बाद भी मेरठ में सड़के बेहाल

मेरठ। डेमेज सड़कों को लेकर बीती शुक्रवार को लखनऊ में सीएम योगी की पीडब्लूडी अफसरों के साथ बैठक में नसीहतों का असर अभी मेरठी अफसरों पर नजर नहीं आ रहा है। मेरठ की सड़कें इस लायक नहीं रहे गयी हैं कि उसने होकर सफर पूरा किया जाए। बेगमपुल जो शहर का सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहा उससे जीरो माइल्स चौराहे की ओर जाने वाले रास्ते को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढे में यह सड़क है। यह हाल तब है जब आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत शर्मा इस रास्ते को लेकर तमाम सक्षम अधिकारी जो शासन में बैठे हैं उनहें भी पत्र खिल चुके हैं। पीडब्डूडी अफसरों को सीएम की नसीहत के बाद उम्मीद थी कि मेरठ की डेमेज हाे चुकी सड़कों की सुध ली जाएगी लेकिन अभी ऐसे आसार नजर नहीं आ रहे हैं। केवल बेगमपुल ही नहीं सड़कों के मामले में मेरठ के अफसरों का ट्रेक रिकार्ड इस वक्त बेहद खराब है। बागपत रोड ,बेगमपुल मार्ग, बच्चा पार्क और कई स्थानों पर स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है। दोनों सड़कों पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिनकी वजह से लोगों को रोजाना आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दोपहिया वाहन चालक गिर चुके हैं और यातायात भी प्रभावित हो रहा है।

निगम और पीडब्लूडी

शहर की सड़कों की बात करें तो नगर निगम और सार्वजनिक निर्माण विभाग की इनको बनाने और रखरखाव की जिम्मेदारी है, जबकि छावनी क्षेत्र की सड़कें कैंट बोर्ड और ग्रासिम इंजीनयिरंग वर्क्स के आधीन आती हैं। अभी छावनी की सड़कों की बात नहीं केवल महानगरीय इलाकों की सड़कों का जिक्र किया जा रहा है। वैसे पीडब्लूडी ही नहीं सड़कों की जहां तक बात है तो नगर निगम के आधीन आने वाली तमाम ऐसी सड़कें जिनसे होकर यदि गाड़ी से गुजरना है तो फिर हिचकाेलों की आदत होनी चाहिए।

ये हैं बदहाल सड़कें

जो सड़कें पीडब्लूडी के आधीन आती हैं उनमें मेरठ बागपत रोड फुटबॉल चौक से दिल्ली-देहरादून बाईपास तक का क्षेत्र, मेरठ गढमुक्तेश्वर मार्ग गोकुलपुर काली नदी से सिसौली और आगे तक का क्षेत्र, रुडकी रोड जिसको स्टेट हाइवे 22 भी बताया जाता है। मेरठ बिजनौर मार्ग, एनएच 58 हाइवे मुल्हेडा बपारसी को जाेड़ने वाला मार्ग, एनएच-14 लावड को हाइवे से जोड़ने वाला मार्ग और पूरा मवाना रोड भी इसमें शामिल है। इसके अलावा महानगर के कई दूसरे मुख्य मार्ग भी पीडब्लूडी के आधीन हैं, लेकिन लगता है कि यह बात सार्वजनिक निर्माण विभाग के अफसर भूले हुए हैं। महानगर की अंदरूनी रिहायशी इलाकों, गलियों और बाजारों की अधिकांश सड़कें नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।

एक साल बाद भी सड़का का इंतजार

कैंट विधायक के गृह क्षेत्र वेस्टर्न कचहरी रोड पर सीएम ग्रिड योजना के तहत एक साल से काम चल रहा है। इस इलाके के लोगों को एक साल वेस्टर्न कचहरी रोड का इंतजार है। सीएम ग्रिड योजना ने वेस्टर्न रोड को लील लिया। यहां 13 सितंबर 2025 को शुरू हुए काम का एक साल पूरा होने पर इसे ‘विकास कार्य की बरसी’ बताते हुए आरोप लगाया कि एक साल बाद भी करीब 60 प्रतिशत काम पूरा नहीं हुआ है। हिंदू संगठन और आरटीआई एक्टिविसट डॉ संदीप पहल ने सड़क की बरसी मनाई। डॉ. संदीप पहल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, नालियों के निर्माण और अतिक्रमण को लेकर भी सवाल उठाए। डॉ. संदीप पहल ने कहा कि सड़क निर्माण के नाम पर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनके अनुसार, कई जगह सड़क और नाले का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा। जहां अतिक्रमण है, वहां कार्रवाई करने के बजाय कथित लेनदेन के जरिए अतिक्रमण को स्थायी करने का काम किया जा रहा है। कचहरी गेट, लॉयर्स टॉयलेट, मंदिर और आरजी कॉलेज के आसपास के हिस्सों का उदाहरण देते हुए उन्होंने निर्माण व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कई घर सड़क और नाले के निर्माण के बाद आसपास की जमीन के स्तर से नीचे हो गए हैं। बारिश के दौरान ऐसे घरों में नाले और सड़क का पानी पहुंचने की आशंका भी जताई। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रोजेक्ट की आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों से स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। जांच के दौरान शिकायतकर्ता से भी तथ्य लिए जाएं। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए, सरकारी धन की रिकवरी हो और दोषियों को जेल भेजा जाए।

Share This Article