अखिलेश के दांव से रास चुनाव में मुश्किल में भाजपा

Shekhar Sharma
6 Min Read

राज्यसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव ने धनराज नथवानी को उतारने और तीसरे उम्मीदवार के दांव से भाजपा के लिए 8वीं सीट के लिए खड़ी की चुनौती

नई दिल्ली। अखिलेश यादव ने प्रो. राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी का नामांकन दाखिल कराकर न सिर्फ कॉरपोरेट जगत के समीकरणों का इस्तेमाल किया है, बल्कि भाजपा को अपने ही सहयोगी खेमे के पारिवारिक जुड़ाव के सामने ला खड़ा किया है, जिससे इस चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव द्वारा धनराज नथवानी को उतारने और तीसरे उम्मीदवार के दांव से भाजपा के लिए 8वीं सीट को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती बन गया है। दावा है कि अखिलेश यादव के इस कदम से क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा को होने वाले संभावित नुकसान की स्थिति से इंकार नहीं किया जा रहा है।

राज्यसभा के लिए चार वोटों का बाहर से करना होगा इंतजाम

यूपी में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है। भाजपा (255 विधायक) और उसके सहयोगी दलों (अपना दल, RLD, SBSP, निषाद पार्टी) को मिलाकर एनडीए के पास 7 सीटें आसानी से जीतने के बाद लगभग 33 अतिरिक्त वोट बचते हैं। मसलन ये है कि 8वीं सीट जीतने के लिए भाजपा को कम से कम 4 और बाहरी वोटों की जरूरत है। राजा भैया की पार्टी (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक) के 2 विधायक हैं। अगर वे भाजपा के साथ आते हैं, तब भी 2 वोटों की कमी रह जाती है। ऐसे में धनराज नथवानी जैसे रसूखदार उम्मीदवार के आने से भाजपा के लिए अपने सहयोगियों और निर्दलीय विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो रहा है।

एनडीए में सेंधमारी तय-नथवानी का कॉरपोरेट रसूख

समाजवादी पार्टी एनडीए गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों और छोटे दलों के संपर्क में है और उन्हें आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन देकर साधने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी एनडीए गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों और छोटे दलों के संपर्क में है और उन्हें आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन देकर साधने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा धनराज नथवानी के कॉर्पोरेट बैकग्राउंड और उनके पिता के एनडीए के साथ पुराने संबंधों के कारण, सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का उनके प्रति नरम रुख होने की आशंका है, जिससे गुप्त रूप से पाला बदलने का खतरा बढ़ गया है।

क्रॉस वोटिंग से भाजपा को कैसे और कितना नुकसान होगा?

नुकसान का प्रकारप्रभाव और विवरण
8वीं सीट का नुकसानयदि एनडीए के 3 से 4 विधायक भी क्रॉस वोटिंग करते हैं या अनुपस्थित रहते हैं, तो भाजपा अपनी 8वीं राज्यसभा सीट गंवा सकती है और यह सीट सपा के खाते में चली जाएगी।
मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक झटकायूपी में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में क्रॉस वोटिंग होना भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक शर्मिंदगी का कारण बनेगा। यह संदेश जाएगा कि विपक्ष सत्ताधारी गठबंधन में दरार डालने में सफल रहा है।
गठबंधन की साख पर असरभाजपा को अपने सहयोगी दलों (जैसे सुभासपा, निषाद पार्टी, RLD) पर पूरी निर्भरता रखनी होगी। यदि सहयोगियों के खेमे से वोट छिटकते हैं, तो भविष्य में एनडीए गठबंधन के भीतर अविश्वास और खींचतान बढ़ सकती है।
विधायकों की वफादारी पर सवालयह चुनाव 2027 से इसको विधायकों की पार्टी के प्रति उनकी वफादारी की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। क्रॉस वोटिंग से पार्टी के भीतर आंतरिक अनुशासन कमजोर होगा और बागियों को शह मिलेगी।

संक्षेप में, अखिलेश यादव के इस चक्रव्यूह ने भाजपा को अपनी 8वीं सीट बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि यहां एक भी वोट की क्रॉस वोटिंग भाजपा के बने-बनाए समीकरण को बिगाड़ सकती है।

AIMIM का मुस्लिम हमला

धनराज नथवानी को राज्यसभा के टिकट पर AIMIM ने अखिलेश पर हमला बोला है। एक्स पर लिखा है कि भाजपा NDA गठबंधन के समर्थित राज्य सभा सांसद परिमल नथवानी के बेटे धनराज नथवानी को सपा ने अपना राज्य सभा का प्रत्याशी घोषित किया है क्या ये डील भाजपा नेता और अखिलेश यादव की भाभी अपर्णा यादव ने कराई है? मुसलमान भाजपा के खिलाफ सपा को वोट दें और सपा राज्य सभा में भाजपा के लोगों को भेजे। वाह अखिलेश यादव जी, सपा के मुसलमान नेता क्या दरी बिछायेंगे? भाजपा की असली टीम सपा ने खेल दिखा दिया।

Share This Article