दलित साधने को अंबेडकर जयंती इवेंट

Shekhar Sharma
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अंबेडकर जयंती पर इस बार अधिक कार्यक्रम, सभी दलों में मची है होड़, अंबेडकर जयंती मनाने भर से क्या मिल जाएंगे दलित वोट

मेरठ। साल 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इस बार राजनीतिक दलों में अंबेडकर जयंती मनाने की जैसी होड़ इस बार नजर आती है, पहले कभी नजर नहीं आयी। महानगर के प्रमुख चौराहों पर अंबेडकर जयंती के भीमकाय होडिंग्स बता रहे हैं कि दलितों के बगैर चुनावी कश्ती उस पार नहीं पहुंच सकेगी। लेकिन सवाल दलितों से पूछा जा रहा है कि क्या जो अंबेडकर जयंती मनाने भर से वो किसी भी राजनीतिक दल के पिछलग्गू हो जाएंगे। या फिर दलित चिंतक यानि अंबेडकरवाद पर भी मंथन करेंगे। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में दलित वोट बैंक को साधने के लिए राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिसे 2027 के चुनाव (विशेषकर यूपी विधानसभा) के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है

अंबेडकर जयंती या शक्ति प्रदर्शन

साल  2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए, सभी प्रमुख दल- भाजपा, सपा, बसपा और आज़ाद समाज पार्टी- दलितों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए जयंती के माध्यम से बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि जब भी शक्ति प्रदर्शन की बात आयी है तो भगवा खेमा बाकियों पर भारी पड़ा है, लेकिन क्या अंबेडकर जयंती मना लेने भर से भगवा खेमा दलितों पर डोरे डाल सकेगा।  भाजपा प्रदेश भर की दलित बस्तियों और बूथों पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर बाबा साहेब को याद कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2027 के चुनावों से पहले ‘डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ शुरू की है, जिसके तहत प्रतिमाओं के सौंदर्यीकरण और उनके ऊपर ‘सुरक्षात्मक छतरी’ लगाने का काम किया जा रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में डा. अंबेडकर की प्रतिमाओं के साथ बदसलूकी भी की जा रही है।

सपा और कांग्रेस कहां

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस अभी ताक कहीं नजर नहीं आती, लेकिन सपा की अनदेखी नहीं की जा सकती। सपा का ‘PDA’ अभियान  समाजवादी पार्टी इस बार बूथ और सेक्टर स्तर पर अंबेडकर जयंती मना रही है, जो उसके ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है। भगवा खेमे के लिए यही सिरदर्द बना हआ है।

अंबेडकर जयंती या राजनीतिक इवेंट

यह जयंती केवल एक औपचारिक उत्सव न होकर, यूपी में राजनीतिक जमीन मजबूत करने का एक बड़ा ‘पॉलिटिकल शो’ बन गई है।  दलितों को अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए, पार्टियां इस दिन को ‘सामाजिक समरसता दिवस’ या ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाकर अपना दावा पेश कर रही हैं। लखनऊ सहित पूरे यूपी में, विशेष रूप से गोमती नगर स्थित अंबेडकर पार्क में, भव्य आयोजन होते हैं, जहां विभिन्न जातियों द्वारा मुफ्त भंडारे और झांकियां निकाली जाती हैं।

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