
डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि ईरान से लड़ाई खत्म कराने में चीन करे प्रभाव का इस्तेमाल, बदले में चीन को क्या देगा यूएस
नई दिल्ली। बीजिंग पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप भले ही ऑन रिकार्ड यह बात ना मानें लेकिन यह सच है कि वह चाहते हैं कि ईरान में फंसे अमेरिका को निकालने में चीन मदद करे, लेकिन ट्रंप से सवाल पूछा जा रहा है कि इसके बदले में चीन को क्या मिलेगा। क्या चीन पर लगाए गए ट्रेरिफों में बड़ी और व्यापक स्तर पर ढील दी जाएगी। सवाल काफी हैं।
स्ट्रेट होर्मूज खुले तो बात बनें
समुंद्री रास्ते स्ट्रेट होर्मूज पर ईरानी मिसाइलों के पहरे ने अमेरिका को सांसत में डाला हुआ है। तमाम कोशिशों के बाद भी अमेरिका स्ट्रेट हाेर्मूज को नहीं खुलवा सका है। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी अमेरिका की मदद में हिचक रहे हैं। ईरान उन्हें पहले ही धमका चुका है। मिडिल ईस्ट के बाकि देशों का भी कमोवेश ऐसा ही हाल है कि वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अमेरिका को केवल स्ट्रेट होर्मूज का खुलवाने की ही दरकार नहीं बल्कि वह चाहता है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्ति के नाम पर कोई सम्मान जनक समझौता हो जाए, लेकिन पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा इतना आसान नहीं है। अमेरिका को इसकी बड़ी कीमत चुकानी हाेगी। इतनी बड़ी की उसकी विदेश नीति का सिस्टम गड़बड़ा सकता है।
ताइवान पर अमेरिका का रूख
डोनाल्ड ट्रंप के साथ बीजिंग में मौजूद अफसरों के समूह ने चीनी अधिकारियों से स्ट्रेट होर्मूज के मसले पर चर्चा की और कहा कि चीन को अपने असर का यूज करते हुए इस रास्ते को खुलवाना चाहिए। उनको फिर से पानी के रास्ते को खोलने के लिए दबाव बनाना चाहिए। इसमें में चीन को अधिक भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि संकट के समाधान में सहायता करने के लिए बीजिंग को अमेरिका से रियायतों की आवश्यकता होगी, संभवतः ताइवान के मुद्दे पर। ताइबान के सवाल पर ट्रंप तैयार हो सकेंगे इस बात की गारंटी नहीं दी जा सकती।


