सुप्रीम कोर्ट की डबल बैंच ने बीती माह अप्रैल में इसको लेकर दिया है आदेश, क्या हुआ मानव संसाधन मंत्री का वादा
नई दिल्ली। मानव संसाधन मंत्री का वादे के इतर सर्वोच्च न्यायालय की जस्टिस माहेश्वरी व जस्टिस चंदुरकर की पीठ ने यूनियन टेरिटरी ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर बनाम सबावानी आदि के मामले में 30 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में पुनः स्पष्ट कर दिया है कि टीईटी अर्हता पूर्वव्यापी प्रभाव से सेवारत शिक्षकों पर लागू रहेगी। यद्यपि न्यायाधीश ने उपरोक्त मामले में आर्टिकल 142 का उपयोग कर मात्र उक्त मामले के लिए टेट देने की छूट ३ वर्ष सहित कुछ अन्य छूट भी दी है। परन्तु आदेश में स्पष्ट कर दिया हैं कि यह केस नजीर के रूप में उपयोग नहीं होगा और स्टेट निर्धारित समयसीमा में टेट अर्हता पूर्ण न करने वालों पर आवश्यक कार्यवाही कर सकती है। उक्त मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के सदृश प्रकरण है, कहीं न कहीं भविष्य में इसकी आँच शिक्षामित्रों पर भी आएगी।
मानव संसाधन मंत्री का बयान
मानव संसाधन मंत्री धर्मेन प्रधान ने फ़रवरी-मार्च में ही कहा था कि बँगाल जिताइये, हम आपके लिए कुछ करेंगे। परंतु इसके बावजूद सरकारी अधिवक्ता के एम नटराज (एएसजी) ने पुनः स्पष्ट किया कि टेट अर्हता पूर्वव्यापी प्रभाव से सेवारत शिक्षकों पर लागू होगी। शिक्षकों का मानना है कि प्रमोशन को छोड़कर सेवारत शिक्षकों पर टेट अर्हता की अनिवार्यता और उनकों सेवा से बाहर करना कतई उचित नहीं है।


