किस अफसर तक पहुंची यह बड़ी रकम

Shekhar Sharma
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कैंट बोर्ड के सफाई कर्मचारियों से सेलरी 15-20 हजार, फिर एकाउंट में किसने और किसके लिए भेजे पांच-पांच लाख

मेरठ। कैंट बोर्ड के अफसरों और डोर टू डोर ठेकेदार का एक और घपला घोटाला सामने आया है। जानकारों का कहना है कि यह मामला इतना बड़ा है कि सरकार की किसी राजस्व संबंधित जांच करने वाले ऐजेंसी से इसकी जांच करायी जानी चाहिए क्योंकि सफाई कर्मचारियों के एकाउंट में पांच-पांच लाख डालने और फिर निकाल लेना तमाम सवालों को जन्म देता है। यह रकम के सफाई कर्मचारियों के खातों में डाली ही नहीं गयी बल्कि जिन सफाई कर्मचारियों के खातों में डाली गयी उनसे यह रकम उनके एकाउंट से निकलवा कर किस अफसर को पहुंचायी गयी जैसा की आशंका व्यक्त की जा रही है या सामने आना जरूरी है। इसलिए तमाम शंकाओं का समाधान करने के लिए जरूरी है कि मामले की तहत तक जाने के लिए Financial Intelligence Unit (FIU-IND) , आयकर विभाग (Investigation Wing) , ED और सरीखी सक्षम ऐजेंसियां स्वत: संज्ञान लेने भी गरीब सफाई कर्मचारियों के खातों में पांच-पांच लाख के मामले की जांच कर सकती हैं।

“SALARY” के साथ-साथ “Test Payment”

मेरठ कैंट बोर्ड से जुड़े डेबिट अकाउंट नंबर 105005500607 से अगस्त-अक्टूबर 2025 के दौरान हुए वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध बैंक ट्रांसफर शीटों के अनुसार, इस अकाउंट से अनेक लाभार्थियों के खातों में “SALARY” शीर्षक के अंतर्गत उच्च मूल्य की राशियाँ ट्रांसफर की गई हैं। दस्तावेजों के अनुसार, 18 अगस्त 2025 की ट्रांसफर शीट में कई लाभार्थियों को ₹1,00,000 की पाँच-पाँच एंट्रीज (कुल ₹5,00,000 प्रति लाभार्थी) प्रदर्शित हैं। लगभग 46 दिन बाद 3 अक्टूबर 2025 की दूसरी ट्रांसफर शीट में इन्हीं लाभार्थियों में से अनेक को पुनः ₹5,00,000 प्रति व्यक्ति की एंट्रीज दिखाई गई हैं। दोनों शीटों के परीक्षण में अनुज कुमार, राहुल, योगेश कुमार, रवि कुमार, नीलिमा बंसल आदि नाम कॉमन पाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन व्यक्तियों की सामान्य मासिक आय मात्र ₹15,000 से ₹20,000 के आसपास बताई जाती है। अधिकांश लाभार्थी खाते मेरठ छावनी, बॉम्बे बाजार क्षेत्र की पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक (पूर्व सिंडिकेट बैंक) शाखाओं में संचालित हैं। ट्रांसफर शीटों में “SALARY” के साथ-साथ “Test Payment” रिमार्क भी दर्ज हैं, जिससे इन लेन-देन की वास्तविक प्रकृति पर संदेह उत्पन्न होता है। इसीलिए जरूरी है कि कैंट बोर्ड में संदिग्ध सैलरी ट्रांसफर: 15-20 हजार कमाने वालों के खातों में 10-10 लाख, जांच की जाए और अच्छा तो यही होगा के कैंट बोर्ड के उच्च पदस्थ किसी अधिकारी के स्तर से एक पत्र रक्षा सचिव या फिर डीजी डिफैंस को भेजकर मामले की जांच सीबीआई या फिर ईडी सरीखी ऐजेंसी से कराए जाने की मांग की जाए। अन्यथा फिर कोई आरटीआई एक्टिविस्ट ही इस काम की पहल करेगा।

किस के लिए भेजे गए पांच-पांच लाख

सफाई कर्मचारियों के खातों में जाे पांच-पांच लाख रुपए जमा कराए गए और फिर निकलवा भी लिए गए वो रकम किस के लिए और क्यों भेजी गयी। दस्तावेजों से यह तो साफ है कि यह रकम भेजी गयी और किसने तथा किस एकाउंट से भेजी, उसका खुलासा ऊपर किया जा चुका है, लेकिन सवाल यह है कि पांच लाख की बड़ी रकम का जो वास्तव में संबंधित खातों में क्रेडिट हुई थीं और उनका अंतिम उपयोग क्या रहा? समान लाभार्थियों के नामों का मात्र 46 दिन के अंतराल पर दोबारा उपयोग क्यों किया गया? “SALARY” एवं “Test Payment” रिमार्क का वास्तविक आधार क्या था? इन लेन-देन का वास्तविक लाभार्थी कौन था? या यह मान लिया जाए कि सफाई कर्मचारियों के खातों में यह रकम डालकर फिर उनसे निकलवा कर कैंट बोर्ड के ही किसी अफसर तक पहुंचायी गयी। Transaction Trail, KYC Records, Withdrawal Pattern, Beneficial Ownership और Fund Flow की पूरी जांच हो।

कैंट बोर्ड के अफसर जांच के दायरे में

सफाई कर्मचारियों के खातों में पांच-पांच लाख मामले की जांच करने वाले ऐजेंसी को कैंट बोर्ड के अफसरों को भी जांच के दायरे में शामिल करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि Meerut Cantonment Board से संबंधित प्रारंभिक संकेतों को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए तभी मामले की तहत तक पहुंचा जा सकता है तभी यह स्पष्ट हो सकेगा की सफाई कर्मचारियों के खातों में पांच-पांच लाख पहुंचाने के पीछे यह रकम भेजने वाली की मंशा क्या रही है। वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार, जांच पूर्ण होने तक किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। तथापि, उपलब्ध दस्तावेज जनहित में स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की आवश्यकता अवश्य दर्शाते हैं। इसीलिए मांग की जा रही है कि Financial Intelligence Unit (FIU-IND) , आयकर विभाग (Investigation Wing) , ED और अन्य सक्षम एजेंसियों से अपील है कि वे इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत जांच शुरू करें।

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