
नगर निगम की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगायी रोक, पूर्व में दिए थे नोटिस, सर्किट हाउस के सामने से नहीं हटेंगी दुकानें
मेरठ। सर्किट हाउस के सामने वर्षों से चाय एवं अन्य व्यवसाय संचालित कर रहे व्यापारियों को नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर अपनी दुकानें हटाने एवं स्थान खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इस कार्रवाई के विरुद्ध प्रभावित व्यापारियों की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी एवं अधिवक्ता विपुल सिंघल द्वारा उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिका प्रस्तुत कर राहत की मांग की गई। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि अगली सुनवाई तक व्यापारियों के विरुद्ध कोई प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें नगर निगम मेरठ अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
अरसे से कर रहे हैं दुकान
अधिवक्ता विपुल सिंहल ने बताया कि संबंधित व्यापारी लंबे समय से उक्त स्थान पर अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। यह स्थान पूर्व में नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराया गया था तथा व्यापारी नियमित रूप से निर्धारित किराया जमा करते रहे हैं। ऐसे में मात्र एक सप्ताह के नोटिस पर उन्हें हटाने की कार्रवाई न्यायोचित नहीं कही जा सकती।
वेंडिंग जोन किए जाएं विकसित
एडवोकेट विपुल सिंहल का कहना है कि केंद्र एवं राज्य सरकार की स्ट्रीट वेंडर नीति के अंतर्गत विभिन्न मार्गों पर वेंडिंग जोन विकसित किए जाने का प्रावधान है। सर्किट हाउस मार्ग पर भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है, जहां वर्तमान दुकानों को व्यवस्थित रूप से वेंडिंग जोन के रूप में संचालित किया जा सकता है। इससे व्यापारियों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी और नगर निगम की व्यवस्थाएं भी प्रभावित नहीं होंगी। उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम राहत प्रदान किए जाने से क्षेत्र के व्यापारियों में संतोष का वातावरण है। अब सभी की निगाहें 24 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जिसमें मामले के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।


