समस्याओं के अलावा कुछ भी तो नहीं इस वार्ड में

Shekhar Sharma
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एक हो तो बताएं समस्याओं के अलावा वार्ड चाैबीस में कुछ भी तो नहीं, लोगों कहते हैं नरक देखना हैं तो आएं कसेरू बक्सर

मेरठ। महानगर की पॉश कालोनी डिफैंस कालोनी से सटा वार्ड चौबीस यानि कसेरू बक्सर की यदि बात करें तो जगह-जगह गंदगी के ढेर, गड्ढे में रास्ते और सड़कें, अरसे से सफाई का इंतजार कर रहे चौक पड़े नाले नालियां और कई सालों से बनने का इंतजार कर रही अम्हेडा वाली रोड। यह के वाशिदों का कहना है कि मेरठ में यदि कहीं नर्क है तो यही है यही है यही है.. वो यही नहीं रुकते। उनका कहना है कि अब तो उन्होंने समस्याओं से निजात की उम्मीद ही छोड़ दी है। वो बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि समस्याओं को कहां बताना है किससे कहना है कौन इनका समाधान करा सकता है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। दरअसल वो इन समस्याओं को अफसरों और नेताओं को बता-बता कर थक चुके हैं और अब उन्होंने खुद को इस नरक के अनुसार ढाल लिया है। उन्हें यकीन हो गया है कि ना तो अफसर ना जन प्रतिनिधियों को उनकी मुश्किलों और परेशानियों से कोई सरोकार है।

ये हैं समस्याएं

इस इलाके की समस्याओं की यदि बात करें तो स्कूल के सामने कूड़ाघर बना है। बक्सर इलाके में बच्चे बदबू और गंदगी के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। क्योंकि स्कूल के सामने खत्ता बना दिया गया है।सबसे बुरा हाल रास्तों का है। वो चलने लायक नहीं रह गए हैं। कई बार हादसे हो चुके हैं। अम्हेड़ा रोड गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। आवारा पशु और कुत्ते लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। यूं कहने को सुप्रीमकोर्ट का आदेश भी है कि स्ट्रीट डाॅग पब्लिक पैलेस पर नजर ना आएं, लेकिन लगता है कि नगर निगम अफसर सुप्रीमकोर्ट के आदेश से ही शायद बेखबर हैं। स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। जहां तक शिकायतों की बात है तो वो तो करते करते अब थक चुके हैं खुद को आदि बना लिया है। इस वार्ड की बात करें तो अम्हेडा, राजेन्द्र और बक्सर की करीब चालिस हजार से ज्यादा की आबादी यहां बसती है। यहां पार्षद आनंद कुमार हैं। लोग बताते हैं कि पार्षद अपनी ओर से तमाम प्रयास करते हैं। वहीं पार्षद आनंद कुमार का कहना है कि वह समस्याओं को लेकर तमाम अफसरों के सामने आवास उठाते हैं। काफी काम कराया भी गया है।

बारिश में बुरा हाल

इस इलाके में सबसे बुरा हाल बारिश के मौसम में होता है। बारिश के मौसम में घर से निकलने में भी डर लगता है। लोगों ने बताया कि आबादी और स्कूल के बीच बने इस कूड़ाघर में बारिश के मौसम में इतनी सड़ाध आती है कि सांस लेना भी मुश्किल होता है। छुट्टा पशु और कुत्ते कूड़े को सड़कों तक फैला देते हैं, जिससे गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। कई बार यहां मृत पशुओं को फैंक दिया जाता है। बरसात के दिनों में कूड़े से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के इलाकों में फैल जाता है और लोगों का जीना मुश्किल कर देता है। अम्हेड़ा रोड समेत कई इलाकों की सड़कें जर्जर हैं और गड्ढों से भरी हुई हैं। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी की समस्या बनी रहती है।

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