
विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि अगले 30 दिनों तक स्ट्रेट होर्मूज रहेगा ईरान के कब्जे में, यूएस को हिमाकत ना करने की चेतावनी
नई दिल्ली। युद्ध विराम और शांति समझौता होने के बावजूद स्ट्रेट हाेर्मूज को लेकर अदावत जारी है। अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप और सिरिक और बंदर-ए लेंघे शहर पर भारी बमबारी की है। जवाब में ईरानी मिसाइलों ने बहरीन और कुवैत में मौजूद यूएस के आर्मी बेस पर कहर बरपाया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमले की जुर्रत की तो करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर ईरान के हमलों के बाद अरब के कई देश एक बार फिर दहशत में हैं। बहरीन और कुवैत में हालात एकाएक असामान्य हो गए हैं। लोगों में ईरानी मिसाइलों का खौफ साफ देखा जा सकता है। इराक के शीर्ष राजनयिक ने अमेरिका-ईरान समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन और होर्मुज की समुद्री नाकाबंदी को हटाने का आह्वान किया।
ईरानी विदेश मंत्री ने धमकाया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को लगभग धमकाते हुए कहा है कि अगले तीस दिन यानि एक माह तक स्ट्रेट होर्मूज ईरान के नियंत्रण में ही रहेगा। अमेरिका की एक छोटी से गलती हालात को असामान्य कर देगी। उन्होंने कहा ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सेना पर जवाबी हमले किए हैं और आगे के हमलों के लिए “करारा जवाब” देने की चेतावनी दी है।
ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है और “सैन्य कार्रवाई से काम पूरा करने” की धमकी दी है। इस बीच पाकिस्तान ने दाेनों ही देशों से संयम का आग्रह किया है। वहीं दूसरी ओर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी का कहना है कि ये हमले “सुरक्षा और शांति स्थापित करने और संकट को हल करने के उद्देश्य से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रयासों को कमजोर करते हैं”।
सुरक्षा के लिए सीधा खतरा
एक बयान में उनके हवाले से कहा गया है, “विश्वासघाती हमले बहरीन और कुवैत की भूमि पर नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा, स्थिरता और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जीसीसी ने बहरीन साम्राज्य और कुवैत राज्य द्वारा अपनी सुरक्षा को मजबूत करने, अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और अपने क्षेत्रों की अखंडता को बनाए रखने के लिए उठाए गए सभी उपायों के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।”


