जल तांडव! शहर के कई इलाके टापू में तब्दील

Shekhar Sharma
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नाले नालियों पर किए गए अवैध कब्जों को लेकर कब जागेंगे सिस्टम को चलाने वाले अफसर, नाले नालियों को कब्जा मुक्त करने की दरकार

मेरठ। लगतार चार दिन से हो रही बारिश के बाद केवल मेरठ ही नहीं आसपास के तमाम इलाकों में जल ताड़व है। शहर के तमाम ऐसे इलाके हैं जो बारिश में डूबकर टापू में तब्दील हो गए हैं। कई घरों में बारिश के पानी के साथ सांप और दूसरे जलीय जीव घरों में आ गए हैं। बारिश के पानी के साथ कानखजूरे और बिच्छे व विषधरों यानि सांपों के देखकर लोगों के होश फाख्ता हैं। वो बुरी तरह से डरे हुए हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल शहर की घटनी आबादी वाले इलाकों का है जहां ग्राउंड फ्लोर यानि जिनके मकान नीचे हैं और सड़क ऊंची कर दी गयी है।लोगों की कीचन, ड्राइंग रूम और बैड रूम में पानी भर गया है। यहां तक कि टॉयलेट जाने में भी मुसीबत उठानी पड़ रही है। नाले नालियों और सड़क पर पानी भर जाने की वजह से कई घरों में टॉयलेट में पानी बैक मार रहा है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि करें तो क्या करें जाए तो जाए कहां कहें तो किस्से कहें क्योंकि कोई भी सुनने वाला नहीं। शहर के कई इलाकों में बारिश की वजह से पुराने मकान गिर गए हैं।

नाले नालियों को मुक्त करने का वक्त

महानगर में जबरदस्त जलभराव और कई इलाकों के टापू में तब्दील हो जाने के बाद बेहतर तो यही होगा कि पूरे महानगर में तमाम विभाग मिलकर जिला प्रशासन व पुलिस के नेतृत्व में नाले नालियों को मुक्त कराने का अभियान चलाएं। यह काम केवल नगर निगम पर नहीं छोड़ा सकता है। नगरायुक्त सौरभ गंगवार अपने स्तर से जितना बेहतर हो सकता है कर रहे हैं। उनके प्रयासों के चलते कई ऐसे इलाके हैं जहां पूर्व में पानी भरा करता था, लेकिन इस साल पानी नहीं रूका। महानगर में जिस प्रकार से प्रभावशाली लोगों ने नाले नालियों पर कब्जे कर लिए हैं उसके लिए युद्ध स्तर पर सभी विभाग मिलकर जब तक अभियान नहीं चलाएंगे तब तक हालात ऐसे ही बने रहेगे हो सकता है कि इससे भी बदत्तर हो जाएं। नाले नालियां यदि अवैध कब्जों से मुक्त हो जाएं तो कभी भी बारिश का पानी रूकेगा नहीं। नाले नालियों पर कब्जे कर लोगों ने नर्सिंगहोम, होटल रेस्टोरेंट और कांप्लैक्स तब बना लिए हैं। तमाम इलाकों में ऐसे मकान हैं जहां घरों के आगे नालियों पर पक्के फर्श डाल दिए गए हैं। जहां ऐसे हालात हैं वहां नगर निगम का सफाई विभाग लाचार बन जाता है। इसलिए जरूरी है कि फोर्स लगाकर पूरे महानगर में नाले नालियों को मुक्त कराने का अभियान छेड़ दिया जाए। पूरे महानगर की जलभराव की समस्या का इसके अलावा कोई दूसरा समाधान नहीं है।

दुकानों में पानी सामान खराब

शहर के तमाम ऐसे इलाके हैं जहां बारिश के जमा हुए पानी का स्तर दो फुट से ज्यादा पहुंच गया है। कई इलाकाें में डिवाइडर तक डूब गए। हालात कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निचले इलाकें में तमाम ऐसे दुकानें हैं जहां पानी भर गया है। पानी भर जाने की वजह से दुकानों में रखा सामान पूरी तरह से खराब हो गया है। लिसाड़ी क्षेत्र, नौचंदी क्षेत्र, ब्रह्मपुरी, टीपीनगर, कोतवाली के कई ऐसे इलाके हैं जहां काफी निचाई पर हैं। इन इलाकों में जो दुकानें हैं उनमें सड़क पर भरा बारिश का पानी घुस गया है। किराने की तमाम ऐसी दुकानें हैं जहां बारिश का पानी भर जाने से सामान खराब हो गया है। जो बेकरी शॉप नीचे हैं उनमे पानी भर गया। ऐसी दुकानों के डीप फ्रीज खराब हो गए। अच्छी बात यह रही कि जब दुकानदार दुकान को बंद कर घर गए थे तब वो पावर का स्वीच ऑफ कर गए थे अन्यथा बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

बारिश मांगने वाले कर रहे तौबा

जाने लेवा गर्मी में बारिश की दुआएं मांगने वाले अब बारिश के नाम पर तौबा कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे तो जुलाई की चिलचिलाती गर्मी ही भली थी। कम से कब घरों से बाहर तो निकल पा रहे थे। अब तो हालात यह है कि घरों में ही कैद होकर रह गए हैं। जिनको बेहद जरूरी या कहें इमरजैंसी में घर से निकलना पड़ रहा है, ऐसे लोग रास्तों पर भरे पानी से होकर जा रहे हैं। जो लोग बाइक और कारों से निकल रहे हैं उनको भी मुसीबत उठानी पड़ रही है। सड़क पर पानी भर जाने की वजह से साइलेंसर में पानी घुस जा रहा है जिसकी वजह से गाड़ियां बंद हो जा रही हैं। लोगों का कहना है कि उनकी समझ नहीं आ रहा है इस मुसीबत से कैसे मुक्ति मिलेगी। लेकिन राहत की बात यह है कि मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को कक्षा 1 से 12 तक के सभी परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्ड के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। प्रशासन ने अभिभावकों और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।

इन इलाकों में बुरा हाल

शहर के तमाम ऐसे इलाके हैं जहां बारिश के पानी में कहर बरपाया हुआ है। इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल हमेशा की तरह लिसाड़ीगेट क्षेत्र के लिसाड़ी रोड और इसके आसपास की बस्तियों का हुआ है। लिसाड़ी रोड नहर में तब्दील हो गयी है। केवल लिसाड़ी रोड ही नहीं, जाकिर कालोनी, माधवपरम और उसकी उपबस्तियां, नौचंदी क्षेत्र, टीपीनगर का मलियाना इलाका इसका भी बेहद बुरा हाल है। कमोवेश रोहटा रोड की स्थित भी खराब है। ऐसे तमाम इलाकों की लंबी फेरिस्त है जो टापू बने हुए हैं। चार दिन से हो रही झमाझम बारिश ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए हैं।

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