ईरान की यूएस ठिकानों पर भीषण बमबारी

Shekhar Sharma
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ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को भी चेतावनी दी

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से चरम पर है, जहाँ अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और तटीय रक्षा अड्डों पर 24 घंटे के भीतर दो बार भीषण बमबारी की है। इस ताजा टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने और तेल टैंकरों पर ड्रोन हमलों के बाद से युद्ध की स्थिति गंभीर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले की चेतावनी के बाद, अमेरिकी सेना ने तेहरान, बंदर अब्बास और क़ेशम द्वीप सहित कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर सिलसिलेवार बमबारी की है। इन हमलों के जवाब में, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को भी चेतावनी दी है और उन्हें रोका है।

ईरानी हमले में यूएस जवानों की मौत

मध्य पूर्व में अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इस भीषण जवाबी हमले में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा पुष्टि की गई है कि संघर्ष की शुरुआत से अब तक कुल 6 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।

यूएस फिफ्थ फ्लीट को बनाया निशाना

ईरानी सेना ने बहरीन में मौजूद अमेरिका की आंख और कान माने जाने वाले ईरानी सेना ने बहरीन में मौजूद अमेरिका की आंख और कान माने जाने वाले यूएस फिफ्थ फ्लीट (US Fifth Fleet Base) को निशाना बनाया। (US Fifth Fleet Base) को निशाना बनाया। इस हमले में बहरीन के सलमान पोर्ट पर स्थित नौसैनिक बुनियादी ढांचे और सैन्य उपकरणों के बड़े गोदामों में भीषण आग लग गई। इस ताज़ा संघर्ष के दौरान बहरीन और कुवैत (शुआइबा पोर्ट) के सामरिक ठिकानों पर हुए हमलों में अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। पेंटागन की आंतरिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आया है कि ड्रोन और मिसाइल हमले इतने भीषण थे कि सैनिकों को संभलने का मौका नहीं मिला। अमेरिकी सीनेट और रक्षा विशेषज्ञ इसे सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी विफलता मान रहे हैं, क्योंकि खुफिया चेतावनियों के बावजूद इन ठिकानों पर हवाई हमलों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (ओवरहेड शेल्टर) नहीं थे।

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