नरक में तब्दील हो चुका है यादगारपुर

Shekhar Sharma
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शुद्ध पेयजल को तरस रहे वाशिंदे, साफ सफाई की लचर व्यवस्था बनी है मुसीबत, घरों में सांस लेना भी हुआ है दुश्वार

मेरठ। महानगर का यादगारपुर वार्ड 46 जहां ट्रिपल इंजन सरकार का राज है सिस्टम की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की वजह से नरक मे तब्दील हो चुका है। जितनी भी जनसमस्याएं हो सकती हैं, वो सब इस वार्ड में देखने को मिल जाएंगी। यहां के लोगों का कहना है कि पार्षद को चुनने में गलती हो गयी है। हालांकि पार्षद हर्ष पाल सिंह ट्रिपल इंजन यानी भाजपा का हिस्सा हैं। उनकी गिनती भाजपा नेताओं में की जाती है।

समस्याओं के अलावा कुछ नहीं

महानगर के इस वार्ड में समस्याओं के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता। लगता है कि जिन्हें चुना है उनको इस वार्ड और यहां की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है। यहां के ज्यादातर रास्ते जर्जर हैं। यहां के लोग बदबू, गंदगी के बीच रह रहे हैं। नालियां कूड़े से पटी हैं। सड़कों पर गड्ढों की वजह से अक्सर हादसे हेा रहे हैं। घरों में सप्लाई हो रहा बदबूदार पानी लोगों को बीमार कर रहा है। बिजली के तारों के जाल से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। लोग अपने जनप्रतिनिधि से खासे खिन्न नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि शिकायतें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन समाधान की जगह सिर्फ आश्वासन मिले। नालियों से निकाला गया कूड़ा कई दिनों तक वहीं पड़ा मिला, जो बारिश में दोबारा नालियों में बह जाता है। मुख्य बाजार में दुकानों के सामने कूड़े के ढेर और आसपास बदबू रहती है। जर्जर हैंडपंप और खुले बिजली के बॉक्स हादसों का खतरा बढ़ाते मिले। ट्रांसफॉर्मरों पर उगी झाड़ियां और पेड़ों से टकराते बिजली के तार बार-बार फॉल्ट की वजह बन रहे हैं। वहीं वार्ड की कई सड़कों पर बड़े गड्ढे और टूटी पुलिया लोगों के आवागमन में परेशानी पैदा करती मिलीं। नालियों की सफाई के बाद निकाला गया कूड़ा कई दिनों तक सड़क किनारे ही पड़ा रहता है। बारिश होने पर वही कचरा दोबारा नालियों में चला जाता है, जिससे नाले चोक हो जाते हैं और जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। मेन रोड और कई गलियों में बड़े-बड़े गड्ढे हैं। हल्की बारिश में ही पानी भर जाता है, जिससे सड़कें और अधिक क्षतिग्रस्त हो रही हैं। लोगों का कहना है कि आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार होते हैं। बिजली सिस्टम का भी बुरा हाल है। कई स्थानों पर बिजली के तार पेड़ों और घरों से सटकर गुजर रहे हैं। बारिश के दौरान करंट उतरने का खतरा बना रहता है। वहीं ट्रांसफॉर्मरों के आसपास उगी झाड़ियों और खुले बिजली बॉक्स भी दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रहे हैं।

ये है प्रमुख समस्याएं

वार्ड में टूटी सड़कें और पुलिया तथा मुख्य मार्ग और गलियों में गहरे गड्ढे हैं। नई बनी पुलिया भी पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। इनसे आए दिन हादसे होते हैं। बिजली व्यवस्था की बात करें तो पेड़ों से टकराते बिजली के तार पावर अफसरों के लचर सिस्टम व कार्यप्रणाली की पोल खोल रहे हैं। इसके अलावा खुले बिजली बॉक्स और खराब स्ट्रीट लाइट हादसों का कारण बन रहे हैं। इस वार्ड शुद्ध पेयजल तक मय्यसर नहीं है। ज्यादातर घरों में या तो आरओ लगवाए गए हैं या फिर बीस लीटर की पानी की कैन सौ रुपए में खरीद कर लाते हैं। सबसे बुरा हाल सफाई के इंतजामों का है। ख्य बाजार में कूड़े के ढेर, नालियों की सफाई में लापरवाही और जलभराव से लोगों व व्यापारियों को परेशानी हो रही है।

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