


कहने को महानगर की पॉश कालोनियों में शुमार, फिर भी नहीं है पुरसाहाल, नहीं किसी को सुध लेने की फुर्सत
मेरठ। महानगर का अजंता कालोनी गढ़ रोड का इलाका यूं कहने को पॉश कालोनियों में शुमार किया जाता है लेकिन जनसमस्याओं की बात करें तो नागरिक सुविधाओं के मामले में यह पूरी तरह से अभिशप्त है। जनसमस्याओं से आजिज आ चुके यहां के वाशिंदों उलहना देते हैं कि दलित बस्ती होने की वजह से सिस्टम यहां के लोगों और उनकी समस्याओं से मुंह मोड़े हुए हैं। अफसर ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी लगता है कि इस कालोनी और इसकी समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। वो बताते हैं के सिस्टम को अनेक बार समस्याओं से रूबरू करा चुके हैं। जिनको नुमाइंदगी सौंपी उन्हें भी बता चुके हैं। इस वार्ड के नुमाइंदों के अलावा जो उनके आका है उन्हें भी अनेकों बार बताया जा चुका है, लेकिन इतना कुछ कहने के बाद भी हािसल कुछ नहीं हुआ है। हालात बद से बत्तर हैं। समस्याओं के चलते लगता है कि सिस्टम और नुमाइदों ने किनारा कर लिया है। यहां के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है और जो हालात हैं उससे लगता है कि अजंता कालोनी वार्ड 16 को लावारिस माने बैठे हैं वो इसलिए क्योंकि यहां के लोग संयमित और शांत हैं। सब कुछ बर्दाश्त करते हैं और उफ तक नहीं करते। इस वार्ड की नुमाइंदगी जिन्हें सौंपी गयी है उनका नाम डा. अनुराधा है लेकिन डा. अनुराधा इस वार्ड की समस्याओं का इलाज नहीं कर पा रही हैं। वो मानती हैं कि समस्याएं हैं और बताती हैं कि इनके लिए उनके स्तर से काफी प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ का समाधान भी करा दिया गया है। इस वार्ड की भौगोलिक स्थिति की यदि बात की जाए तो अजंता कालोनी के अलावा मंगल पांडे नगर व राजीव नगर आदि शुमार किए जाते हैं।
रास्ते ऊंचे घर नीचे
इस वार्ड के लोग नगर निगम के ठेकेदार के मारे हैं। जिस ठेकेदार ने रास्ते बनाने का ठेका लिया, उसने खडंजा ऐसा डाला कि रास्ता तो ऊंचा हो गया लेकिन घर नीचे हो गए। इसका नतीजा यह हुआ की बारिश में जब पानी भरता है तो वो पानी घरों में घुसने लगता है। पानी की निकासी ना हो और नाले नालियों का गंदा पानी घरों में घुस आए में यहां रहने वालों की हालत क्या होगी इसका अंदाजा भर लगाया जा सकता है। इस वार्ड के देवू उर्फ देवत्त कौशिक ने बताया कि इस वार्ड के लोग नगर निगम के ठेकेदार के मारे हैं। जिस ठेकेदार ने रास्ते बनाने का ठेका लिया, उसने खडंजा ऐसा डाला कि रास्ता तो ऊंचा हो गया लेकिन घर नीचे हो गए। इसका नतीजा यह हुआ की बारिश में जब पानी भरता है तो वो पानी घरों में घुसने लगता है। पानी की निकासी ना हो और नाले नालियों का गंदा पानी घरों में घुस आए में यहां रहने वालों की हालत क्या होगी इसका अंदाजा भर लगाया जा सकता है। इस वार्ड के देवू उर्फ देवत्त कौशिक ने बताया कि नालियां चोक होने और सड़कें ऊंची-नीची बनने से हल्की बारिश में ही जलभराव हो जाता है। कई जगह लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंच जाता है और बच्चों का स्कूल जाना भी मुश्किल हो जाता है।
ये हैं समस्याएं जिनके समाधान हैं चाहते
वार्ड 16 की समस्याओं की बात करें तो उनमें तमाम घरों में इलाकों में बदबूदार पानी की शिकायत है। दूषित पेयजल के सेवन से लोग बीमार हो जाते हैं। इतना ही नहीं यहां पर स्ट्रीट लाइट खराब होने से रात में अंधेरा रहता है। नियमित सफाई और कूड़ा उठान नहीं होने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। नालियां चोक होने और सड़कें ऊंची-नीची बनने से हल्की बारिश में ही जलभराव हो जाता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नालियां चोक होने और सड़कें ऊंची-नीची बनने से हल्की बारिश में ही जलभराव हो जाता है। कई जगह लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंच जाता है और बच्चों का स्कूल जाना भी मुश्किल हो जाता है। गलियों में बिजली के पोल नहीं हैं, इसलिए घरों से तार खींचकर बिजली ली जा रही है। बारिश में करंट उतरने का खतरा बना रहता है। बिजली के तारों के कारण रोज हादसे का डर रहता है और स्ट्रीट लाइटें भी खराब पड़ी हैं। खुले बिजली के बॉक्स और छतों से गुजरते तार हल्की बारिश में ही फॉल्ट कर जाते हैं, जिससे घंटों बिजली बाधित रहती है। समस्याओं की कमी नहीं समस्या यह है कि समस्याओं काे कोई सुनने वाला नहीं।
नगरायुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि महानगर की जनसस्याओं के लिए नगर निगम प्रशासन लगातार काम कर रहा है। जिस भी वार्ड से जो पार्षद समस्या बताते हैं उसको प्राथमिकता के आधार पर हल कराया जाता है। वह स्वयं भी नियमित रूप से महानगर का निरीक्षण करते हैं। किसी को यदि कोई समस्या है तो वह आकर बता सकता है या अपने पार्षद की मार्फत प्रार्थना पत्र भेज सकता है। हर दशा में समस्या का समाधान कराया जाएगा।


