
जलते घरों को देखने वालों फूंस का छप्पर आपका है, पीछे-पीछे तेज हवा है बाकि मुकद्दर आपका है, उसके कत्ल पर मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर आप भी चुप हो अगला नंबर आपका है
मेरठ। शास्त्रीनगर में आज चुनाव के बहिष्कार के बैनर लगा दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि मतदान के दिन वो घरों से ही नहीं निकलेंगे। वहीं दूसरी ओर आजाद समाज पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल आज आंदोलनकारियों से मिला। इस बीच शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के वाशिंद आशियानों को बचाने की लड़ाई में अब अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उनके जिस आंदोलन की ताप मेरठ से वाया लखनऊ और दिल्ली तक महसूस की जा रही थी, वो तपिश अब इसलिए नजर नहीं आ रही है क्योंकि चालिस के इतर जिनके अभी तक सील नहीं लगी है उन्होंने अपना रास्ता अलग कर लिया है। उन्होंने केवल रास्ता ही अलग नहीं किया है बल्कि बाकियों को भी चालिस से दूर रहने की सलाह देते देखे जा सकते हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि यदि इनके साथ नजर आए और किसी ने वीडियो बनाकर आवास विकास भेज दिया तो अफसरों की नजर में आ जाओगी और अफसरों की नजर में आने का सीधा-सीधा मतलब फिर पहले सील और फिर जेसीबी का एक्शन तय है। इन सारे घटनाक्रम के बाद लोग दो फाड हो गए हैं। जिनके आशियानों पर सील लग चुकी है या जिनके यहां आवास विकास जेसीबी चलवा चुका है वो खुद को अब अकेला महसूस कर रहे हैं। अकेला इसलिए क्योंकि सत्ताधारियों और व्यापार संघ ने तो पहले ही उनसे किनारा कर लिया है, जिस डोरने आपस में एकता रूपी माला को बांधा हुआ था वो डोर भी टूट गयी है। जिनके भवनों पर सील लगा दी गयी है, वो अब अलग थलग या कहें अकेले पड़ गए हैं। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि जब सेंट्रल मार्केट का कांप्लैक्स ध्वस्त किया गया था उस वक्त यदि एकजुटता दिखायी गयी होती तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। उन व्यापारियों की बर्बादी पर चुप रहे इसलएि आज हमारा नंबर आया है और जो आज हमारे नंबर आने पर चुप है अगला नंबर हर हाल में उनका है। इसीलिए वो कह रहे हैं कि = जलते घरों को देखने वालों फूंस का छप्पर आपका है, पीछे-पीछे तेज हवा है बाकि मुकद्दर आपका है, उसके कत्ल पर मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया, मेरे कत्ल पर आप भी चुप हो अगला नंबर आपका है=
पैसे कर दिए वापस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चालिस भवनों पर आसन्न ध्वस्तीकरण की कार्रवई के आदेशों के बाद कानूनी लड़ाई के जो विकल्प छांटे गए हैं उनमे ंपीआईएल दायर किया जाना भी शुमार है। सुप्रीमकोर्ट में पीआईएल बच्चों का खेल नहीं। अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ती है। इसी के चलते आपस में चंदा किया गया था, लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि जिन्होंने चंदा दिया था उनमें से कुछ का कहना था कि ईओडब्लू वालों से भी पैसे लिए जाएं। हालांकि उनकी माली हालत ऐसी नहीं कि पीआईएल के लिए चंद की मोटी रकम दे सकें। कारोबार तो पहले ही बंद कर दिया गया है, किसी प्रकार बस चुल्हा जल रहा है वो भी इसलिए कि दुख कितना ही बड़ा हो ना तो परिवार को भूखा रह सकते हैं ना खुद रहा जा सकता है। ऐसे परिवारों से चंदा मांगने की बात वाकई बेतुकी हैै। इसी के बाद ही जिन्होंने चंदा दिया था अब उनके पैसे वापस कर दिए जाने की बात सुनने में आ रही है।
डा. वाजपेयी से मिले
सेटबेक के नोटिसों के बाद जिन पर आवास विकास की कार्रवाई की तलवार लटक रही है उन सभी लोगों को साथ लेकर इस प्रकरण में खुलकर मदद कर रहे आशीष वत्स नई दिल्ली में राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मिले। आशीष वत्स ने बताया कि डा. वापजेयी ने अपनी ओर से बेहतर से बेहतर प्रयास करने का वादा किया है और वह कर भी रहे हैं। हाईलेबर पर सरकार में उनकी बात चल रही है। केवल परिणाम आना बाकि है।


