ट्रंप के दावे को बताया झूठ का पुलिंदा

Shekhar Sharma
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स्ट्रेट होर्मूज पर आज भी ईरान का कब्जा, अमेरिका नौसेना के कब्जे का दावे को दुनिया के विशेषज्ञों ने बताया झूठ का पुलिंदा

नई दिल्ली। स्ट्रेट होर्मूज जंग छिड़ने से पहले जहां से प्रतिदिन करीब 150 शिप गुजरा करते थे वहां से अब प्रतिदिन पांच से आठ शिप गुजरते हैं वो भी ईरान की मर्जी से। इन शिप में चीनी और रूस सके शिप होते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्ट्रेट हाेर्मूज पर अमेरिकी नौसेना के कब्जे के दावे को खुद अमेरिकी विशेषज्ञों ने एक सिरे से खारिज करते हुए झूठ का पुलिंदा करार दिया है। पूर्व अमेरिकी राजनयिकों और स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का दावा जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। अमेरिकी नौसेना वहां एस्कॉर्ट ऑपरेशन चला रही है और ईरान की नाकाबंदी तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन पूरा जलमार्ग अभी भी बंद पड़ा है, जिसका सीधा मतलब है कि नियंत्रण अमेरिका के पास नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार दावा कर रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का ‘पूर्ण नियंत्रण’ (Total Control) है और अमेरिकी नौसेना वहां मुस्तैद है अमेरिकी विशेषज्ञों ने इसको काेर झूठ करार दिया है।

ईरान का मजबूत कब्जा

स्ट्रेट हाेर्मूज का उत्तरी हिस्सा ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है और दक्षिणी हिस्सा ओमान के क्षेत्रीय जल में है। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जिससे सभी देशों के जहाजों को शांतिपूर्ण पारगमन (Transit Passage) का अधिकार है, लेकिन ईरान इस कानून को दरकिनार कर इस पर एकाधिकार का दावा कर रहा है।

मौत का रास्ता

पानी का रास्ता स्ट्रेट हाेर्मूज अब मौत का रास्ता बना दिया गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस रणनीतिक मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है। ईरान ने जलमार्ग में समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाई हैं और जहाजों पर हमले किए हैं। युद्ध से पहले इस मार्ग से रोजाना लगभग 130 से 140 वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे, जो ईरान की नाकाबंदी के कारण घटकर प्रतिदिन मात्र 8 से 15 जहाज रह गए हैं। ईरान केवल चुनिंदा मित्र देशों (जैसे चीन, रूस, भारत) के जहाजों को ही अपनी शर्तों पर गुजरने की अनुमति दे रहा है।

एक दूसरे के खिलाफ दावे

स्ट्रेट हाेर्मूज खोलने शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध और तीखी बयानबाजी जारी है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की हर्जाने की मांग को खारिज कर उल्टा ईरान से ही पिछले 50 वर्षों के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की इस मांग को खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका भी पिछले 50 वर्षों में ईरान द्वारा किए गए संघर्षों और नुकसान के एवज में तेहरान से हर्जाना वसूलेगा।

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