छोटे भूखंड धारकों को बातचीत का न्यौता, लेकिन गए नहीं, 44 को राहत नहीं अफसरों ने मांगी फोर्स
मेरठ। सील लगे 44 भूखंडों को तोड़ने के लिए आवास विकास के अफसरों ने प्रशासन से फोर्स व मजिस्ट्रेट मांग लिया है। राहत के सवाल पर आवास विकास के अफसरों ने सुप्रीमकोर्ट के आदेश की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि ३५ मीटर वाले भूखंड मालिकों को अफसरों का रवैया आज राहत देने का नजर आया। आवास विकास अफसरों ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके, यह बात अगल है कि कोई भी बातचीत में शामलि होने आवास वकिास परिषद नहीं पहुंचा। लेकिन इसके बाद भी अफसरों ने कहा है कि 21 सितंबर तक उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। याद रही कि सुप्रीमकोर्ट में अगली सुनवाइ 21 सितंबर को होनी है। लेकिन ४४ को गिराने की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। आवास विकास प्रशासन चाहता है कि 35 मीटर भूखंड वाले स्वयं ही थोड़ा-थोड़ा तोड़ लें ताकि कल को जब कोर्ट में सुनवाई हो तो वहां पर बताया जा सके कि छोटे भूखंड वालों ने भी सेटबैक छोड़ दिए हैं। इसके अलावा आज फिर अफसरों ने साफ कर दिया है कि यदि ४४ जो सील हैं उन्हें तोड़ा जाता है तो उसका खर्चा आवंटियों से वसूला जाएगा। इसके लिए करना कुछ नहीं है। इन आवंटियों ने कपाउंडिंग के लिए जो रकम रखी है उसमें से तोड़फोड़ में आने वाला खर्चाा वसूल कर लिया जाएगा।
क्यों साधे रहे चुप्पी
आवास विकास पर धरने प्रदर्शन के दौरान आज जमकर हंगामा हुआ। हंगामे के दौरान प्रदर्शनकारियों में शामिल कुछ लोगों ने आवास विकास वालों को खूब खरीखोटी भी सुनाई। इस मौके पर एसपी सिटी समेत पुलिस प्रशासन का भारी अमला जमा रहा। लेकिन किसी ने भी आवास विकास वालों को खरीखोटी सुनाने वालों को रोकने टोकने की जहमत उठाने की जरूरत नहीं समझी। इसके बाद यह पूछा जाने लगा कि यह खुली छूट किस के इशारे पर है। इसके अलावा प्रदर्शन में बड़ी संख्या में गुर्जर बिरादरी के लोग नजर आए, इसके भी निहितार्थ निकाले जाने लगे।


