व्यापारी नेता की भाजपा नेताओं से उठाई आवाज बुलंद करने की मांग, शैंकी वर्मा ने दिया अविनाश पांडे के श्लोक का जवाब
मेरठ । किसान नेता दिग्विजय भाटी एवं मोहित जाटव के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित मारपीट के मामले पर शैंकी वर्मा ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे द्वारा उद्धृत श्लोक के जवाब में कहा कि ‘शक्ति का वास्तविक आभूषण संयम और पद की वास्तविक प्रतिष्ठा न्याय से होती है। समुद्र अपनी मर्यादा में रहकर महान है, उसी प्रकार वर्दी और सत्ता की शक्ति भी तभी सम्मानित होती है जब वह कानून और न्याय की मर्यादा में रहे। ‘उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या समाज का नहीं, बल्कि नागरिकों के सम्मान, कानून के शासन और पुलिस की जवाबदेही का सवाल है।
खुलकर आवाज उठाने का आग्रह
शैंकी वर्मा ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सोमेंद्र तोमर, अरुण गोविल, संगीत सोम, अमित अग्रवाल और धर्मेंद्र भारद्वाज सहित सभी जनप्रतिनिधियों से मांग की कि वे इस मामले में खुलकर आवाज उठाएं और निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कानून के अनुसार स्नढ्ढक्र एवं कठोर कार्रवाई की मांग करें। उन्होंने कहा, ‘जीरो टॉलरेंस केवल भाषणों में नहीं, कार्रवाई में दिखाई देनी चाहिए। यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी है तो कानून सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। ‘
निलंबन का स्वागत
शैंकी वर्मा इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को निलंबित करना निश्चित रूप से एक कदम है, लेकिन यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। हमारी स्पष्ट मांग है कि जिन पुलिसकर्मियों ने कानून को अपने हाथ में लेकर मारपीट और बर्बरता की, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच के बाद तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। यह मामला केवल निलंबन से खत्म नहीं होगा। विवाद तभी समाप्त होगा, जब यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून सबके लिए बराबर है—चाहे वह आम नागरिक हो या वर्दीधारी पुलिसकर्मी। अगर किसी नागरिक के खिलाफ मारपीट करने पर मुकदमा दर्ज होता है, तो कानून की मर्यादा तोड़ने वाले पुलिसकर्मियों पर भी उसी कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम किसी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई नहीं चाहते, लेकिन न्याय में दोहरा मापदंड भी स्वीकार नहीं करेंगे। हमारी मांग है कि पीड़ितों को न्याय मिले, दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज हो और पूरी कार्रवाई पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से हो। तभी जनता का पुलिस और कानून-व्यवस्था पर विश्वास दोबारा कायम होगा।


