दुर्गा की शक्तियों पर हाईकोर्ट तल्ख

Shekhar Sharma
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लंबे समय से लंबित भूमि विवाद की सुनवाई कर रही सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप

नई दिल्ली/लखनऊ। चर्चित IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल पर बतौर IAS उन्हें मिली शक्तियों के दुरूपयोग का आरोप लग रहा है। मामला काफी गंभीर है। गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए फटकार लगा दी है और उनके कृत्य को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रहार की संज्ञा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोंडा में लंबे समय से लंबित भूमि विवाद की सुनवाई कर रही सिविल जज शबीना खान को कथित तौर पर प्रभावित करने के प्रयास को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने गोंडा की कमिश्नर और चर्चित वरिष्ठ आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा जज को फोन करके प्रभावित के कृत्य पर गहरी नाराजगी जतायी है। इसको कोर्ट की अवमानना करार दिया है।

ज़मीन विवाद से जुड़ा हुआ है मामला

पूरा विवाद देवीपाटन मंडल के कमिश्नर के नाम से दर्ज नजूल भूमि से जुड़ा हुआ है. हाईकोर्ट ने ज्योति विद्या मंदिर की ओर से नगर पालिका परिषद गोंडा के खिलाफ 1997 से लंबित नियमित मुकदमे को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिया

सुप्रीमकोर्ट के फैसले का हवाला

दुर्गा शक्ति नागपाल के कृत्य को लेकर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया जिसमें न्यायिक कार्रवाई से जुड़े मामलों में जजों को धमकी या दबाव में लेने को गंभीरता से लिया गया है। कमिश्नर की ओर से कोर्ट के सामने रखे गए पक्ष के मुताबिक उक्त जमीन कार्यालय भवन और अन्य सरकारी प्रयोजनों के लिए आरक्षित थी। राज्य की ओर से आरोप लगाया गया कि उस भूमि पर स्कूल भवन का निर्माण कर लिया गया और विवाद करीब तीन दशक से सिविल कोर्ट में लंबित है। मुकदमा साक्ष्य के चरण में लंबित था और उसमें यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी था।

मंडल से बाहर किया जाए तवादला

स्कूल ने आरोप लगाया था कि राज्य के अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर कोर्ट पर अनुचित दबाव बना रहे हैं. इसी आधार पर मुकदमे को देवी पाटन मंडल से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की गई थी. विवाद तब और गंभीर हो गया जब गोंडा की सिविल जज सीनियर डिवीजन शबीना खान ने कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल के साथ 15 जुलाई को हुई कथित टेलीफोन बातचीत की जानकारी दी।  जज के अनुसार बातचीत में उनकी छुट्टी के साथ-साथ उनकी अदालत में लंबित एक मामले का भी संदर्भ था। इसके बाद जज ने 4 अगस्त 2026 को जिला जज गोंडा से मामले को उनकी कोर्ट से ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। बाद में जिला जज ने मुकदमे को समान क्षेत्राधिकार वाली गोंडा की दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। इससे स्कूल की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल ट्रांसफर याचिका निष्प्रभावी हो गई।

कमिश्नर का इंकार नहीं

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कमिश्नर ने फोन किए जाने से इनकार नहीं किया है. कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि लंबित मुकदमे के संदर्भ में कोई पक्षकार फोन करके अदालत से कैसे संपर्क कर सकता है। भूमि विवाद मामले में राज्य सरकार तथा नगर पालिका परिषद गोंडा पक्षकार है। न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ अदालतों को अपमान और दबाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

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