

कमिश्नरी ही नहीं पूरे शहर में किसानों के ट्रैक्टर-मार्च का साइड इफैक्ट, हालात बद से बदत्तर पैदल निकला भी हो गया दुश्वार
राकेश टिकैत बोले अफसर किसानों की समस्याओं को लेकर नींद में हैं, उन्हें जगाने के लिए यहां पर आना पड़ा है
मेरठ। चालिस दिन पहले दिए गए ज्ञापन को लेकर जब सिस्टम चलाने वाले अफसरों ने कोई तवज्जो नहीं दी तो भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर हजारों किसानों ने कमिश्नरी पर चढ़ाई कर दी। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी इसमें शामिल हुए। राकेश टिकैत के आने की खबर फैलने के बाद जिन किसानों ने कमिश्नरी आना मुलतबी कर दिया था, फिर उन्होंने भी ट्रैक्टर उठाया और सीधे कमिश्नरी की ओर चल दिए। नतीजा यह हुआ कि केवल कमिश्नरी ही नहीं उस ओर जाने वाले तमाम रास्तों पर केवल तिरंगा लगे ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर नजर आ रहे थे। सिस्टम के आला अफसरों की बात करें तो वो पूरी तरह से लाचार और किसान नेताओं के सामने याचक अवस्था में थे। किसान नेताओं को समझाने का प्रयास किया रहा था कि उनकी जो भी समस्याएं स्थानीय स्तर पर समाधान होनी है उनका समाधान तुरंत कर दिया जाए और जो शासन से होनी है, उसको लेकर एक मेमोंडम लखनऊ भेज दिया जाएगा। लेकिन आज का दिन भाकियू का था अफसरों या पुलिस फोर्स का नहीं। पूरा सिस्टम भाकियू नेताओं की ताल पर नाच नजर आता था। ना कोई गाली गलौच ना ही प्रदर्शनकारियों को चांटे या लाठियां। वहीं दूसरी ओर राकेश टिकैत के आने की खबर के बाद दिन निकलते ही किसानों के रैले कमिश्नरी की ओर बढ़ते नजर आने लगे। सुबह से ही किसान ट्रैक्टर ट्रॉली पर तिरंगा लगाकर तिरंगा रैली निकलते हुए कमिश्नरी चौराहा पर पहुंचने लगे। दोपहर के 12:30 बजे तक पूरा चौराहा किसानों के ट्रैक्टर ट्राली से भर गया। कमिश्नर कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर महापंचायत शुरू कर दी गई है। किसान नेताओं के भाषण और रागिनियो का दौरा शुरू हो गया। । इस महापंचायत में जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी पहुंचे तो किसानों किसानों ने पूरा माहौल सिर पर उठा लिया।
हमारा क्या कसूर
जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन ने 21 जुलाई को कलेक्ट्रेट का घेराव करके किसान समस्याओं संबंधित ज्ञापन जिलाधिकारी वीके सिंह को सौंपकर किसान समस्याओं का 40 दिन में समाधान करने का समय दिया था लेकिन किसी भी समस्या को समाधान नहीं किया गया जिससे किसानों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा किसान यहां से नहीं जाएंगे।
ये चाहते हैं किसान
किसानों नलकूप के बिजली कनेक्शन के लोड मनमाने तरीके से बढ़ाना । लोड बढ़कर किसानों से पेनल्टी वसूलने और बिजली के बढे बिल भेजना। किसानों के कनेक्शन पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाना। ट्यूबवेल के लिए रात में 12:00 बजे के बाद बिजली आपूर्ति देना। ट्यूबवेल पर आए दिन चोरी होना। खाद समितियों में खाद न मिलना। खाद का संकट। समितियों में लोन पर ब्याज की अधिक वसूली। समितियों पर खाद की कालाबाजारी समेत ब्याज वसूली पर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। चीनी महंगी होने के बावजूद किसानों को बोनस न मिलना। गन्ना मूल्य का रूका हुआ भुगतान। नगर निगम सीमा में आए ग्रामों मैं सड़क बिजली पानी आदि सुविधाओं की बदहाली।नगर निगम समेत सभी विकास खंडों तहसीलों में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने में बड़ा भ्रष्टाचार। तहसीलों में विरासत जमीन नामांतरण अंश निर्धारण के नाम पर अवैध वसूली और लेखपालों का रिश्वत मांगना। तालाब सफाई न होना। तालाब के टेंडर मछली पालन हेतु छोड़े जाने से किसानों को परेशानी। जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज में इलाज न मिलना। सी एच एसी, पी एच सी में सुविधाएं और डाक्टरों का न होना। पशुपालन विभाग में अस्पतालों में डाक्टर न होना, समय पर टीकाकरण न होना।
शहर में महा जाम
भारतीय किसान यूनियन के कमिश्नरी पर महापंचायत से पूरे शहर में महाजाम लग गया। गर्मी और उसम से बेहाल लोगों की गाड़ियां जब जाम में फंसी तो बिलबिला उठे। बेगमपुल पुल चौराहा, पीएल शर्मा रोड, लालकुर्ती पैठ एरिया, माल रोड,, ईव्ज चौराहा, सुभाष नगर, सिविल लाइन, मोहनपुरी, पूर्वी व पश्चिमी कचहरी रोड, हजारी की प्याऊ, मवाना रोड, साकेत चौराहा, कमिश्नर आवास चौराहा, गढ रोड हापुड रोड जहां से भी गुजरे वहां जाम लग गया। भाकियू की महापंचायत का साइड इफैक्ट शहर घंटाघर, केसरगंज, दिल्ली रोड, शारदा रोड, भूमिया का पुल, लिसाड़ीगेट तक नजर आया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महानगर की आज क्या हालत हुई। यातायात को लेकर शहर के लोग जिन पुलिसिया इंतजामों के भरोसे थे वो भाकियू की ट्रैक्टर ट्रालियों की रैली के सामने ध्वस्त हो गए।


