



बंद को लेकर समर्थन देने का सिलसिला बढ़ रहा है तेजी से, आंदोलनकारियों का दावा पूर्ण सफल रहेगा बंद, पूर्व सांसद अवतार भड़ाना पहले ही कर चुके हैं समर्थन
मेरठ। 2 सितंबर के बंद को लेकर समर्थन देने वालों का नंबर तेजी से बढ़ रहा है। मेरठ बार एसोसिएशन के समर्थन की घोषणा को बंद के लिहाज से बड़ा माना जा रहा है।अध्यक्ष एडवोकेट अनुज शर्मा व महामंत्री एडवोकेट परवेज अहमद ने इसके लिए समर्थन पत्र जारी किया है। इसके अलावा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व नर्सिंगहोम एसोसिएशन, बुढानागेट व्यापार संघ के अलावा महानगर के कई ऐसे व्यापार संघ और व्यापारी नेता हैं जिन्होंने बंद के समर्थन का एलान किया है। वहीं दूसरी ओर आज दिन भर बंद के प्रचार के लिए दिन भर माइक लगी गाड़ियां दौड़ती रहीं, हालांकि इनका जोर मेडिकल या नौचंदी क्षेत्र में अधिक नजर आया। आंदोलनाकारियों और मेरठ बचाओ संयुक्त समिति ने अपील की है कि जिन व्यापारियों को अपनी इज्जत प्यारी है अभी एक दिन बचा है सब व्यापारी एक हो जाओ मेरठ में अपनी ताकत दिखा दो सभी व्यापारियों से और व्यापार संगठन सब एक होकर इस ताकत को दिखाएं। दरअसल बंद के समर्थन में शहर के बाजारों के आने की वजह मेरठ विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माणों खासतौर से भवनों में बना लिए गए कांप्लैक्स हैं जिनके सर्वे के खबर आने के बाद लोग तेजी से बंद के साथ जुड़ रहे हैं। शास्त्रीनगर, जाग्रति विहार मेडिकल, हापुड़ रोड और गढ़ रोड और इससे जुड़े इलाकों के जितने भी व्यापार संघ हैं सभी ने समर्थन का एलान किया है। वहीं दूसरी ओर बंद को गुर्जरों का आंदोलन कहे जाने से भी बंद समर्थक जबरदस्त नाराज हैं। उनका कहना है कि इसका जवाब 2 सितंबर को दिया जाएगा।
तो क्या संयुक्त व्यापार का सूरज अस्ताचल की ओर
2 सितंबर के बंद को लेकर आम आदमी के बीच स्वीकार्यता और संयुक्त व्यापार संघ का समर्थन देकर बाद में मुकर जाने के बाद अब संयुक्त व्यापार संघ चलाने वालों पर भी व्यापारियों में तमाम सवाल उठ रहे हैं। व्यापारी पूछ रहे हैं कि 2 सितंबर का मेरठ बंद शास्त्री नगर और सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के व्यापार को बचाने के लिए बुलाया गया है। अदालत का आदेश आने के बाद अब पूरे महानगर में ऐसे संपत्तियों को सर्वे शुरू हो गया है। दावा किया जा रहा है कि प्राधिकरण ने ऐसे करीब दस हजार संपत्ति चिन्हित की हैं जो पुश्तैनी भवनों में बनायी गयी हैं और उनकी सूची में करीब आठ लाख ऐसे संपत्तियां बतायी जा रही हैं। सर्वे पूरा होने के बाद ऐसे भवनों को चिह्नित कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है। इसके अंतर्गत अलग-अलग जोन में कर्मचारी अपने अनुसार सर्वे कर रहे हैं। अभी तक दिल्ली रोड, बागपत रोड, गंगानगर, मोदीपुरम क्षेत्र, सिविल लाइंस में सर्वे किया जा चुका है। आज जो कुछ शास्त्रीनगर व सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ हो रहा है वैसा ही कुछ अरसे के बाद महानगर के दूसरे व्यापारियों के साथ होगा। यह साफ नजर आ रहा है। यदि आज शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को बचा लिया जाता है तो यह नजीर बन जाएगा ओर फिर महानगर के बाकि व्यापारियों पर लटकी तलवार भी हटने का रास्ता खुल जाएगा, लेकिन इस मौके पर संयुक्त व्यापार संघ का साथ देने के बजाए पीछे हट जाना मेरठ के व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा है। शहर के व्यापार संघों की बात करें तो उनका कहना है कि वो बंद में तो शामिल होना चाहते हैं लेकिन व्यापार संघ को चलाने वालों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते।
शहर के बड़े व्यापारी नेता विपुल सिंहल सात फेरे का कहना है कि जब मेरठ के व्यापारियों को संयुक्त व्यापार संघ को चलाने वालों के समर्थन की जरूरत है तब वो घरों में बैठे हैं। इससे मेरठ के व्यापारियों ने व्यापार संघ को चलाने वाले के लिए भी अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं और वो किस मुंह से व्यापारियों के बीच आने की हिम्मत जुटा पाएंगे। एक अन्य व्यापारी नेता ने बताया कि जो हालात बने हुए हैं उसके चलते लगता है कि आने वाले दिनों में संयुक्त व्यापार संघ का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा या फिर इसको चलाने वालों को खुद व्यापारी समाज ही बदल देगा। 2 सितंबर के मेरठ बंद के बाद कुछ व्यापारी नेताओं की माने तो यह होने जा रहा है। यदि वाकई ऐसा हो गया तो मेरठ की व्यापारी राजनीति में इसको नयी व्यापारी राजनीति का आगाजा माना जाएगा।
आबूलेन, बेगमपुल पीएल शर्मा रोड सदर
शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट में कार्रवाई की वजह घरों में दुकानों का बना लिया जाना बताया जा रहा है जिसके विरोध में 2 सितंबर का बंद बुलाया गया है। लेकिन आबूलेन, बेगमपुल, पीएम शर्मा रोड, बोम्बे बाजार, सदर बाजार सरीखे महानगर के प्रमुख बाजारों की यदि बात की जाए तो यहां तो सारी दुकानें ही घरों में बनायी हुई हैं। आबूलेन का बाजार बंगला एरिया में शुमार है। वहां पहले बंगले हुआ करते थे, जो बाद में बड़े-बड़े शोरूम और कांप्लैक्स में तब्दील हो गए। इसी तर्ज पर पीएल शर्मा रोड पर जितनी भी दुकानें हैं वहां पहले मकान हुआ करते थे। कमोवेश यही स्थिति बेगमपुल व सदर तथा बोम्बे बाजार की भी है।


