RLD को बीस सीट से ज्यादा के मूड में नहीं BJP

Shekhar Sharma
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यूपी में सहयोगी दलों को ब्लैकमेल की स्थिति में नहीं आने देना चाहती है भाजपा का अपने दम पर सरकार का प्रयास

नई दिल्ली। साल 2027 में होने वाली विधानसभा चुनाव में भाजपा फिलहाल जयंत चौधरी के लिए बीस से ज्यादा सीटें छोड़ने के मूड में नहीं। यह भी संभव है कि जयंत का कोटा बीस से भी घटा कर और कम कर दिया जाए। भाजपा की रणनीति रालोद को केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रखने की है। जयंत के लिए अपनी पार्टी को पूर्वांचल या राज्य के अन्य हिस्सों में प्रवेश करना बेहद मुश्किल होगा, जिससे जयंत चौधरी की मोलभाव करने की क्षमता पश्चिम यूपी के कुछ जिलों तक ही सिमट जाएगी। दरअसल भाजपा उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 323 से 328 सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। पार्टी अपने सभी सहयोगियों (रालोद, अपना दल-एस, सुभासपा और निषाद पार्टी) के लिए केवल 75 से 80 सीटें छोड़ने पर सैद्धांतिक सहमति बना चुकी है। ऐसे में भाजपा का मुख्य ध्यान अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करने पर है, जिससे किसी भी सहयोगी दल द्वारा ‘ब्लैकमेल’ किए जाने की गुंजाइश बेहद कम हो जाती है।

जयंत ने मांगी 35 सीटें

रालोद ने आगामी चुनाव के लिए 33 से 36 सीटों की मांग रखी है। लेकिन विश्लेषकों और सूत्रों के अनुसार, भाजपा उसे 20 के आसपास सीटें दे सकती है। रालोद वर्तमान में एनडीए गठबंधन का एक अहम हिस्सा जरूर है, लेकिन वह भाजपा को किसी भी तरह से मजबूर या ब्लैकमेल करने की स्थिति में नहीं है। भाजपा ने सीटों और क्षेत्रों का जो खाका खींचा है, उसके तहत रालोद एक ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका में ही नजर आ रही है, जिसका पूरा फोकस पश्चिमी यूपी में अपनी ताकत बनाए रखने पर रहेगा।

बड़ी चुनौती मुसलमानों को खोने की

जयंत चौधरी के लिए वेस्ट यूपी में भाजपा के साथ और यूपी में मस्जिदों व मजारों पर बाबा के बुल्डोजर की घटनाओं के चलते मुसलमानों की नाराजगी के चलते अल्पसंख्यक वोट बैंक को बचाए रखने की चुनौती है। रालोद के भगवाकरण के आरोप लगाए जा रहे हैं। सपा का साथ छोड़कर भाजपा के साथ आने के बाद रालोद के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सामाजिक आधार को बचाए रखने की है। पहले समाजवादी पार्टी के साथ होने पर रालोद को पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण का सीधा फायदा मिलता था। लेकिन भाजपा के साथ आने से मुस्लिम मतदाताओं की गारंटी खत्म मानी जा रही है। ऐसे में जयंत चौधरी के लिए यह चुनाव भाजपा पर दबाव बनाने से ज्यादा अपने पारंपरिक जाट वोट बैंक को सहेजने और खुद को साबित करने की परीक्षा है।

जयंत पर अखिलेश के तंज

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव लगातार रालोद और भाजपा के गठबंधन पर तंज कस रहे हैं। उन्होंने बयान दिया था कि “अगर किसी सहयोगी दल को 30 सीटें दी जा रही हैं, तो भाजपा को उनका सम्मान करते हुए 120 सीटें देनी चाहिए”। हालांकि, रालोद ने सपा के इन बयानों को गठबंधन में फूट डालने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मजबूत खड़े हैं।

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