चार्ज के बाद नए SSP का पहला टेस्ट

Shekhar Sharma
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1 सितंबर को पांच हजार तिरंगा टै्रक्टरों के साथ भाकियू का कमिश्नरी घेराव का एलान, 2 सितंबर को मेरठ बंद का एलान उसके बाद दलित महापंचायत का एलान

मेरठ। बैंक टू बैक तीन बड़े विरोध प्रदर्शनों जिनमें पहली सितंबर को भारतीय किसान यूनियन की ओर से किसानों की मांग को लेकर कमिश्नरी के घेराव का एलान जिसमें पांच हजार ट्रैक्टरों के शामिल होने का दावा किया गया है। पांच हजार ट्रैक्टर कमिश्नरी तो छोड़िये यदि मेरठ में एक साथ उतर आए तो पूरे महानगर जाम हो जाएगा। ऐसे में पांच हजार ट्रैक्टर यदि कमिश्नरी पहुंच गए तो क्या होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। सिविल लाइन ही नहीं आसपास के एरिया में भी रहने वालों के हालात घर में बंधक सरीखे हो जाएंगे। पैदल निकलना तक दुश्वार होगा। किसानों की तमाम ऐसी मांगें हैं जिनको लेकर पूर्व में भाकियू की ओर से ज्ञापन दिया गया है, लेकिन उनको पूरा ना करने के आरोप किसान नेताओं ने अफसरों पर लगाए हैं। पहली सितंबर के कमिश्नरी के घेराव से पुलिस निपटेंगी तो बैक टू बैक 2 सितंबर को मेरठ बंद का एलान और बंद भी ऐसा जिसमें बीड़ी सिगरेट पान तंबाकू तक नहीं मिलने की बात कही जा रही है। आवास विकास के सेटबैक के नोटिसों के खिलाफ जो आंदोलन शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट तक सिमटा हुआ था वो अब पूरे महानगर में या कहें जनपद मेरठ में फैल चुका है। महानगर के सभी बाजारों ने बंदी का एलान किया है। संयुक्त व्यापार संघ नवीन गुप्ता और उनकी करीएक आठ सौ संस्थाएं इस बंद के साथ हैं। इतना ही नहीं आबूलेन, बेगमपुल, पीएल शर्मा रोड, सदर बाजार व बोम्बे बाजार, शास्त्रीनगर, जाग्रति विहार, कंकरखेड़ा, शहर व सदर सराफा बाजार सरीखे तमाम बाजार मेरठ बंद में जब शामिल होंगे तो इसकाे भी पुलिस का टेस्ट माना जा रहा है। और इसके साथ ही दलित महापंचायत का एलान जो पूर्ववर्ती चांटेबाज एसएसपी के खिलाफ होने जा रहा है।

बैक टू बैक तीन बड़े विरोध प्रदर्शन

इन तीनों ही घटनाक्रमों को नवागत एसएसपी SSP बीबीजीटीएस मूर्ति का टेस्ट माना जा रहा है। सवाल पूछा जा रहा है कि जो भी हालात इस दौरान बनेंगे या कोई अप्रिय घटना होती है तो उससे फोर्स कैसे निपटेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि पूर्ववर्ती एसएसपी अविनाश पांडे की वजह से मेरठ पुलिस की काफी फजीहत हुई है। एक बार नहीं उनके कृत्य के चलते कई बार पुलिस को आमजन के बीच अप्रिय हालात का सामना करना पड़ा है। हालांकि अविनाश पांडे को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है, लेकिन जो घटनाएं उनके कार्यक्रम और उनकी कार्यप्रणाली के चलते सामने आयीं उनको लेकर नाराजगी खत्म हो गयी हो ऐसा भी नहीं है। खासतौर से एडवोकेट रवि गौतम को लेकर यदि बात की जाए तो उनकी नाराजगी बरकरार है। पुलिस प्रशासन का सारा अमला उन्हे मनाने में जुटा हुआ है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं कि दलित महापंचायत से पहले रवि गौतम पुलिस का प्रेशर मानते हैं या फिर बैकफुट पर आ जाते हैं।

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